इस बार क्या खास है कुम्भ में

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मनमीत
कुंभ मेले के इतिहास में इस बार ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकारी हिसाब से आयोजन महज 28 दिनों को होगा और शाही स्नान भी केवल चार होंगे। यूं कुम्भ शूरू है औऱ पहला शाही स्नान भी हो चुका। उच्च न्यायालय ने भी कोविड 19 को देखते हुए राज्य सरकार को कुंभ की अवधि सीमित करने के लिए कहा था। इस संबंध में साधु संतों से बातचीत करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि कुंभ एक अप्रैल से 28 अप्रैल तक होगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भी कुंभ मेले के संबंध में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) यानी मानक प्रचालन प्रक्रिया जारी कर चुका है। श्रद्धालुओं को इस एसओपी का पालन करना होगा।

82 साल बाद कुंभ 12 साल की बजाये 11 साल में ही आयोजित किया जा रहा है। अब तक कुंभ चार माह तक की अवधि का होता रहा है। ग्रहों के राजा बृहस्पति राशि में प्रत्येक 12 साल बाद प्रवेश करते है। प्रवेश की गति में हर 12 साल में अंतर आता है। यह अंतर बढते बढते सात कुंभ बीत जाने पर एक साल कम हो जाता है। इससे पहले 82 साल पहले यानी 1938 में भी कुंभ 11 साल बाद आयोजित किया गया था। उस दौरान गंगा पार बसा मेला भीषण आग के बाद पूरी तरह से उजड गया था और भगदड में सैकडो यात्रियों की जान गई थी।

मंदिर एक रंग में रंगे और पुजारी पहनेंगे एक जैसी वेशभूषा
कुंभ मेला में हर की पैड़ी क्षेत्र के सभी मंदिर एक रंग में रंगे नजर आ रहे है। साथ ही मंदिरों के पुजारी भी एक जैसी वेशभूषा में दिख रहे है।
श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि हर की पैड़ी को भव्य व दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। जिससे कुंभ में आने वाला श्रद्धालु यहां से मंत्रमुग्ध होकर लौटे।

होंगे केवल चार शाही स्नान-
हरिद्वार कुंभ का पहला शाही स्नान, महाशिवरात्रि के अवसर पर 11 मार्च को सात और 27 अप्रैल वैशाख पूर्णिमा पर बैरागी अणियों के तीन अखाड़े कुंभ में स्नान करेंगे। 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या और 14 अप्रैल मेष संक्रांति के मुख्य शाही स्नान पर सभी 13 अखाड़ों का हरिद्वार कुंभ में स्नान होगा.

नहीं होंगे भंडारे और भजन-
कोरोना महामारी के दौर में आयोजित होने वाला यह कुंभ मेला बीते अन्य कुंभ मेलों से काफी अलग होगा। इस बार कुंभ मेले के दौरान किसी भी स्थान पर संगठित रूप से भजन एवं भंडारेे की मनाही रहेगी।

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