यूपी चुनाव : अखिलेश यादव से ज़्यादा मुसलमानों को अपनी राजनीतिक समझ पर चिंतन की ज़रूरत

द लीडर : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत ने मोदी-योगी मैजिक पर मुहर लगा दी है. भाजपा ने 403 सीटों वाली विधानसभा में 273 सीटें जीती हैं. जबकि विपक्षी दल समाजवादी पार्टी महज 111 सीटों पर ही सिमट गई. बसपा और कांग्रेस का तो लगभग सूपड़ा ही साफ हो गया. और एआइएमआइएम खाता भी नहीं खोल पाई. (UP Election Akhilesh Muslims)

भाजपा जीत के जश्न में मग्न है. तो समाजवादी पार्टी हार के सदमे डूबी है. और उसके समर्थक हार का गुणा-भाग लगा रहे हैं. अखिलेश यादव जो दो दिन पहले तक 300 प्लस सीटें जीतकर सरकार बनाने का दम भर रहे थे. हार के बाद उन्होंने अपने बढ़े वोट शेयर पर ही भारी मन से संतुष्टि ज़ाहिर की है. लेकिन उनके समर्थक संतुष्ट नहीं हैं. ख़ासकर मुस्लिम वोटर, जिन्होंने थोक के भाव में सपा की झोली में वोट फेंक दिए.

समाजवादी पार्टी को 111 सीटों के साथ 32.03 प्रतिशत वोट मिला है. जबकि यूपी में क़रीब 20 प्रतिशत मुस्लिम वोट है. इसमें एआइएमआइएम को 0.39 प्रतिशत वोट मिला है. भाजपा को 2017 में जहां एक प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले थे, 2022 के चुनाव में ये दोगुना हो गया है. इस बार भाजपा को 2 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले हैं. (UP Election Akhilesh Muslims)


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बाक़ी मुस्मिल वोट सपा की ही झोली में पड़ा है. इस तरह मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर, चाहें वे पश्चिमी यूपी की हों पूर्वांचल या रुहेलखंड. यहां मुस्लिम वोटों के दम ही उसकी इज्ज़त बच पाई है. आज़म ख़ान, नाहिद हसन समेत क़रीब 33 मुस्लिम विधायकों ने भी जीत हासिल की. ये जीत उन्हीं सीटों पर मिली है, जहां मतदाता एकजुट होकर जीत दिलाने की हैसियसत में थे.

दूसरा-बाकी सपा के जो प्रत्याशी जीते हैं-वहां भी एकमुश्त मुस्लिम वोटों के बूते ही वे जीत पाए. यहां तक मैनपुरी-इटावा की यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा को नुकसान उठाना पड़ा है. इसलिए मुस्लिम समदुाय के बीच अब ये सवाल और दुविधा दोनों हैं-कि सपा को थोक में भी वोट देकर वो सरकार नहीं बनवा सकते हैं. यही हक़ीक़त है. जिसे 80 बनाम 20 की लड़ाई में खुद को केंद्र में रखने वाले मुस्लिम समुदाय को भी समझनी पड़ेगी.

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने कहा कि, 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटों लंबे समय तक विपक्ष में तो बिठाए रख सकते हैं. लेकिन सरकार नहीं बनवा सकते है. जैसे बिहार में राजद 20 साल से विपक्ष में है. और यूपी में सपा भी अब दूसरे चुनाव में विपक्ष की भूमिका निभाने जा रही है. यही सच्चाई है. जिस पर समाजवादी पार्टी आत्मचिंतन करने को तैयार नहीं है. (UP Election Akhilesh Muslims)

2022 के चुनावी नतीजे यूपी की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित करेंगे. ऐसी संभावना बनती नज़र आ रही है. इसलिए क्योंकि तमाम विरोध और शिकायतों के बावजूद भाजपा की तरफ मुस्लिम वोटरों का रुझान बढ़ा है.


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