डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर : जानें क्या हैं इसके मायनें

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द लीडर | रुपया सोमवार को रिकॉर्ड स्तर पर लुढ़ककर डॉलर के मुकाबले 77.50 तक पहुंच  गया. इससे पहला भारतीय मुद्रा का डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर स्तर 77.05 रुपया था. रुपया सोमवार को 60 पैसा गिरने के साथ इस निचले स्तर तक पहुंचा. रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका समेत तमाम देशों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के रुख के बीच रुपये में यह ऐतिहासिक गिरावट देखी जा रही है.

डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट

सोमवार के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपये ने 77.5 का स्तर पार किया और 77.52 का अब तक का सबस निचला स्तर दर्ज किया. वहीं रुपया कारोबार के अंत में 77.44 के स्तर पर बंद हुआ जो कि इसका अब तक का सबसे निचला बंद स्तर है. बाजार के जानकारों के मुताबिक बॉन्ड यील्ड बढ़ने और फेडरल रिजर्व के द्वारा दरों में और आक्रामक बढ़त करने के अनुमानों से डॉलर इंडेक्स में तेजी देखने को मिल रही है जिससे रुपये पर दबाव पड़ा है, बीते 2 सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपया 409 पैसे टूट गया है.

वहीं बाजार के जानकारों की माने तो डॉलर के मुकाबले रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है. एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक रुपया इस हफ्ते 77.2 से 77.8 के बीच बना रह सकता है. वहीं मेहता इक्किटी के वीपी राहुल कालांतरी के मुताबिक डॉलर रुपया फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट गिरावट आने पर 78 का स्तर तोड़ सकता है. उनके मुताबिक फेडरल रिजर्द के संकेतों के साथ साथ विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और व्यापार घाटा बढ़ने से भी रुपये पर दबाव बढ़ा है.


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इस तरह पड़ेगा आम आदमी पर प्रभाव

डॉलर के मुकाबले रुपये के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचने के देश की अर्थव्यवस्था पर चौतरफा असर पड़ेगा.इसकी सबसे ज्यादा मार आयात बिल पर पड़ेगी क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है.ऐसे में रुपये की गिरावट से कच्चे तेल के आयात बिल में बढ़ोतरी होगी और विदेशी मुद्रा ज्यादा खर्च होगी.

इसके अलावा, लगातार बढ़ रही महंगाई के मोर्चे पर भी मुश्किलें और बढ़ेंगी.साथ ही उर्वरक और रसायन जिनका कि भारत बड़ा आयातक है वो रुपये की कमजोरी से महंगे हो जाएंगे। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामानों से लेकर आभूषण तक महंगे हो जाएंगे.

दरअसल, कच्चे तेल, सोना और अन्य धातुओं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में तय होती हैं। ऐसे में दिनों-दिन रुपये की बिगड़ रही हालत से इनकी खरीद के लिए हमें ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ेगा.घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ेंगी.

पढ़ाना और घूमना होगा महंगा

रुपये में गिरावट से भारतीयों के लिए विदेश में पढ़ाई करना और घूमना महंगा हो जाएगा.घरेलू मुद्रा में इस बड़ी गिरावट से विदेश में अब समान शिक्षा के लिए पहले की तुलना 15 से 20 फीसदी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा.

राहुल गांधी ने साधा निशाना 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में बढ़ती मंहगाई और डॉलर के मुकबाले रुपये के गिरते स्तर को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा, ”भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिरकर 77.47 प्रति डॉलर पर पहुंच गया है.” राहुल गांधी ने मंहगाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए लिखा कि पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल के दामों को 100 रूपये और एलपीजी के दाम 1 हजार से अधिक बढ़ाने के अपने लक्ष्य को पूरा कर लिया है.

राहुल गांधी ने देश की अर्थव्यवस्था पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा, ”आर्थिक दृष्टि से भारत इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. अगर ऐसे ही हालात रहे तो स्थिति आगे चलकर और भी गंभीर हो सकती है. जिसके कारण भारतीयों को गंभीर आर्थिक समस्या का समाना करना पड़ सकता है.” उन्होंने पीएम मोदी पर देश के आर्थिक स्थिति को लोगों से छिपाने का आरोप लगाया. राहुल ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री देश की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सच्चाई को हमेशा के लिए छिपा कर नहीं रख सकते.

क्या होगा कमजोर रुपये से भारत पर असर

घरेलू मुद्रा कमजोर होने से आयात महंगा होता है और ऐसी सभी देश जो आयात पर निर्भर रहते हैं इसका नुकसान उठाते हैं. भारत में फिलहाल रुपये की कमजोरी दोहरा संकट लेकर आई है. पहला- कच्चे तेल की कीमतें अपने ऊपरी स्तरों पर बनी हुई हैं. और देश को डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ रुपये में कमजोरी से देश को डॉलर के लिए भी ज्यादा रुपये चुकाने पड़ रहे हैं.

यानि रुपये में कमजोरी से पेट्रोल और डीजल के सस्ते होने की उम्मीदें और कमजोर हो गई हैं. इसके साथ भी बाकी सभी इंपोर्ट भी महंगा पड़ रहा है. इसके साथ ही महंगे डॉलर से विदेशों में पढ़ाई, घूमना फिरना यहां तक कि विदेश से कर्ज उठाना भी महंगा हो जाएगा. हालांकि दूसरी तरफ निर्यातकों के लिए स्थिति बेहतर है. फार्मा और आईटी सेक्टर को उनकी सर्विस के लिए अब रुपये की कीमत में ज्यादा रकम मिलेगी.

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