यूपी में सियासी उठापटक, सपा ने शिवपाल सिंह पर सौंपा बदायूं , धर्मेंद्र यादव का काटा टिकट

द लीडर हिंदी : लोकसभा चुनाव आते ही उत्तर प्रदेश में सियासत का सियासी दौर शुरू हो गया है. सपा ने अपने ही परिवार के एक सदस्य का टिकट काट दिया. जिसके बाद राजनीति गरम हो गई. बता दें पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का बदायूं लोकसभा सीट से टिकट काटकर सपा ने पूर्व सांसद सलीम शेरवानी और पूर्व विधायक आबिद रजा को साधने की कोशिश की है. वही अब बदायूं सीट से धर्मेंद्र यादव की जगह शिवपाल सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया गया है.

मंगलवार को सपा की जारी तीसरी लिस्ट में बदायूं से शिवपाल सिंह के नाम की घोषणा की गई. जबकि धर्मेंद्र यादव को कन्नौज और आजमगढ़ का प्रभारी बनाया गया है.इसके पीछे की वजह क्या है ये भी जान लिये.दरअसल बदायूं लोकसभा सीट से पांच बार सांसद रहे पूर्व विदेश राज्यमंत्री सलीम शेरवानी ने किसी मुस्लिम को राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी न बनाए जाने पर रविवार को सपा राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था.

2009 में सपा ने शेरवानी का टिकट काटकर ही धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया था. इसके बाद से शेरवानी लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र यादव के खिलाफ कांग्रेस से मैदान में उतरते आ रहे हैं. वह आंवला लोकसभा सीट से इस बार आबिद रजा को टिकट की पैरवी कर रहे थे. इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने शेरवानी के बेटे शाद शेरवानी को शेखूपुर और आबिद रजा को शहर सीट से टिकट नहीं दिया था.

जब शेरवानी ने इस्तीफा दिया तो आबिद रजा भी उनके साथ थे. वही चर्चा थी कि आबिद भी कोई कदम उठा सकते हैं. माना जा रहा है कि अखिलेश ने सलीम शेरवानी और आबिद को साधने के लिए ही चाचा शिवपाल यादव को मैदान में उतारा है.

आबिद रजा के बागी तेवर
पूर्व विधायक आबिद रजा एक बार फिर से बागी तेवर अपनाने लगे हैं. बरेली मंडल में बदायूं, आंवला, शाहजहांपुर, बरेली किसी भी लोकसभा सीट सपा से कोई मुस्लिम प्रत्याशी न बनाए जाने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की है.वही मंगलवार को बयान जारी कर आबिद ने कहा कि यह पीडीए के साथ धोखा है. मुसलमान ठगा सा महसूस कर रहे हैं.वही मुसलमानों में चर्चा है कि उनका इस्तेमाल सिर्फ वोट के लिए किया जाता है. इस तरह उन्होंने सपा को आईना दिखा दिया.

भतीजा मैदान छोड़कर भाग गया है. अब चाचा की बारी
सपा में राजनीतिक उठापटल के बीच बीजेपी ने सपा पर निशाना साधती हुई दिखाई दे रही है. जिसके चलते बीजेपी सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए कहा है कि भतीजा मैदान छोड़कर भाग गया है. अब चाचा की बारी है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से 2019 में एकजुट होकर भतीजे को हराया, उसी तरह से इस बार चाचा को भी हराएंगे. धर्मेंद्र यादव पर कहा कि इस बार उनकी हार की हैट्रिक बनेगी.

आने वाले लोसकभा चुनाव में सपा किसी तरह की लापरवाही करने से कतरा रही है जिसके चलते उसने ये फैसला लिया.सपा ने बरेली समेत मंडल की चार सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. बदायूं से धर्मेंद्र यादव का टिकट काटकर शिवपाल सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया गया है. वही बरेली लोकसभा सीट से प्रवीण सिंह ऐरन को टिकट दिया गया है. अब सभी की नजरे बदायूं सीट पर लगी है.जहां चाचा शिवपाल पर दांव लगा है.

Abhinav Rastogi

पत्रकारिता में 2013 से हूं. दैनिक जागरण में बतौर उप संपादक सेवा दे चुका हूं. कंटेंट क्रिएट करने से लेकर डिजिटल की विभिन्न विधाओं में पारंगत हूं.

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