बसपा ने पूर्व मंत्री हाजी रियाज़ के बेटे को पीलीभीत से टिकट देकर क्या बढ़ा दी है सपा की मुश्किल

द लीडर : उत्तर प्रदेश के ज़िला पीलीभीत की शहर विधानसभा सीट का चुनाव दिलचस्प हो गया है. क़रीब 20 साल तक इस सीट पर मरहूम हाजी रियाज़ अहमद समाजवादी पार्टी का चेहरा रहे. पिछले साल कोरोना से उनका इंतक़ाल हो गया. तो इस बार सपा ने डॉ. शैलेंद्र गंगवार को प्रत्याशी बनाया है. पिता की पारंपरिक सीट से टिकट न मिलने पर हाजी रियाज़ के परिवार ने बग़ावत कर दी. और उनके बेटे डॉ. शाने अली बसपा से टिकट लेकर मैदान में उतर आए हैं. (Pilibhit BSP Samajwadi Party)

शहर सीट से अभी संजय गंगवार भाजपा के विधायक हैं. 2017 के चुनाव में उन्हें 1,36, 486 वोट मिले थे. जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी हाजी रियाज़ अहमद को 93,130 वोट मिले थे.

हाजी रियाज़ अहमद शहर सीट से चार बार विधायक रहे हैं. 1989 में जब वह पहली बार चुनाव जीते थे, तो उन्हें करीब 35 हजार वोट मिले थे. इसके बाद 1991 से साल 2000 तक ये सीट भाजपा के कब्जे में रही. 2002 में हाजी रियाज़ यहां से दाेबारा विधायक बने. तब भी उन्हें 35 हज़ार के क़रीब वोट मिले थे. वह 2017 तक लगातार विधायक रहे. 2007 में उन्हें क़रीब 51 हज़ार और 2012 में 61 हज़ार के करीब वोट मिले थे.


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2017 के चुनाव में भाजपा के संजय गंगवार ने उन्हें क़रीब 43-44 हज़ार वोटों के अंतर से हराया था. तब बसपा के टिकट पर अरशद ख़ान भी मैदान उतरे थे. उन्हें 14,532 वोट मिले थे. (Pilibhit BSP Samajwadi Party)

2017 के चुनाव में पीलीभीत शहर सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3.68 थी. इसमें 1.40 लाख के क़रीब मुस्लिम वोटर हैं. चूंकि इस बार हाजी रियाज़ नहीं हैं. और जातीय समीकरण साधते हुए सपा ने डॉ. शैलेंद्र को मैदान में उतारा है. तब भाजपा और सपा के बीच मुक़ाबला रोचक हो गया. लेकिन डाॅ. शाने अली के मैदान में आने से सपा को थोड़ा झटका तो लगा है.

हालांकि अभी तक ज़मीन पर जो हालात हैं, उससे अधिकांश मुस्लिम समाज सपा के साथ है. जिससे यहां लड़ाई भाजपा बनाम सपा के बीच मानी जा रही है. इस बीच कांग्रेस ने शकील अहमद नूरी को सदर सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है. शकील नूरी रिश्ते में डॉ. शाने अली के मामा हैं. (Pilibhit BSP Samajwadi Party)

दरअसल, हाजी रियाज़ अहमद के इंतक़ाल के बाद उनके परिवार में सियासी विरासत को लेकर घमासान छिड़ गया था. हाजी रियाज़ के दामाद मुहम्मद आरिफ और शाने अली दोनों सदर सीट से टिकट के दावेदार थे.

मुहम्मद आरिफ मरहूम रुकैया आरिफ के शौहर हैं. रुकैया पीलीभीत ज़िला पंचायत की अध्यक्ष रही हैं. पिछले साल ही कोरोना से उनका भी इंतक़ाल हो गया था.


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