उत्तराखंड के हल्द्वानी में 4365 घरों के लोग होंगे बेघर? इसपर 5 जनवरी को होगी सुनवाई

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घर टूटने के विरोध में इक्कठे हुए लोग
घर टूटने के विरोध में इक्कठे हुए लोग

The leader Hindi: उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी में 50 हज़ार आबादी घर छिनने की कोशिशों के बीच ख़ौफ़ में है. जहां लोग 45-50 साल से रह रहे हैं, रेलवे ने उस ज़मीन को अपना बताया है. उत्तराखंड हाईकोर्ट का फ़ैसला भी आ चुका है. 4365 घर तोड़े जाने हैं. उससे पहले नगर निगम ने इन बस्तियों के मलिन बस्ती होने का दर्जा भी ख़त्म कर दिया है. घरों को तोड़ने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं. अख़बारों में विज्ञापन के बाद एक सप्ताह का वक़्त देकर मुनादी पिटवाई जा रही है. आज रेलवे के अफ़सर भी ज़मीन के मौक़ा मुआयना को पहुंचे थे.

घर बचाने के लिए हज़ारों की भीड़ सड़कों पर धरना दिया जा रहा है. दुआएं मांगी जा रही हैं. 90 फ़ीसद घर मुस्लिम आबादी के हैं. 10 फ़ीसद ग़ैर मुस्लिम भी कार्रवाई की ज़द में हैं. कई स्कूल, 9 मस्जिद, 2 मंदिर और अस्पताल भी बुल्डोज़र की ज़द में हैं. तमाम तरह के इल्ज़ाम भी लग रहे हैं. हल्द्वानी सीट कांग्रेस के पास है, जबकि ज़िले की शेष सीट पर भाजपा का क़ब्ज़ा है. चुनाव के दौरान एक बड़े नेता की जनसभा के बाद से बड़ी आबादी के घरों पर संकट के बादल मंडराने की बातें भी आंदोलन के दौरान उछल रही हैं.

 

ख़ैर इस बस्ती को बचाने की आख़री लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है. जनहित याचिका दाख़िल की गई है. कांग्रेस के सीनियर लीडर सलमान ख़ुर्शीद जिनके घर टूटने जा रहे हैं, उनका पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे. प्रभावित बड़ी आबादी की पैरवी हल्द्वानी के विधायक सुमित ह्रदयेश भी कर रहे हैं. वो भी आज दिल्ली में हैं. इस मसले पर शायर एवं राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का भी तीखा बयान सामने आया है. इंसानों के सिर पर साया बचाने के लिए यह लड़ाई सभी को मिलकर लड़ने की ज़रूरत है.

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