बांग्लादेश स्वतंत्रता दिवस: इंदिरा गांधी की सूझबूझ से सिर्फ 30 मिनट में हारा था पाकिस्तान

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भारत 1971 में पाकिस्तान पर अपनी जीत का स्वर्णिम विजय वर्ष का जश्न मना रहा है। 50 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सूझबूझ से पाकिस्तान से जंग में जीत सिर्फ 30 मिनट में हुई थी, जिसके बाद बाद पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारत से अलग होकर बने पाकिस्तान के लिए हमेशा को सबक भी हाे गया, जिसकी तिलमिलाहट आज तक महसूस की जा सकती है। (Indira Gandhis Strategy)

इस जंग में कूटनीति, राजनीति और युद्ध की रणनीति खासी दिलचस्प रही।

1971 के पाकिस्तान और भारत की सरकारें अलग-अलग चुनौतियों से जूझ रही थीं। इसी दरम्यान पाकिस्तानी सेना ने बंगाली नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिसमें आसान शिकार पूर्वी पाकिस्तान में मौजूद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय होने लगा। कत्लोगारत की दहशत इस कदर हो गई कि पीड़ितों को पूर्वी भारत में पनाह लेने को मजबूर होना पड़ा।

भारत सरकार ने भी इन शरणार्थियों की खातिर पूर्वी भारत की सीमाओं को खोल दिया। पूर्वी पाकिस्तान से लगे पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, मेघालय और त्रिपुरा की राज्य सरकारों ने शरणार्थी कैंप लगाए। शरणार्थी जनसमूह की तादाद इतनी ज्यादा हो गई कि भारत की पहले ही बोझिल अर्थव्यवस्था डगमाने लगी।

अर्थव्यव्यवस्था के हालात संभालने और दुश्मन देश को सबक सिखाने का ख्याल प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दिमाग में कौंध गया। उन्होंने 27 मार्च 1971 को पूर्वी पाकिस्तान के मुक्ति संघर्ष के लिये समर्थन देते हुए कहा, ”लाखों शरणार्थियों को भारत में शरण देने से कहीं बेहतर है कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध कर इस संघर्ष को मुकाम पर पहुंचा दिया जाए।”

पूर्वी पाकिस्तानी सेना से अलग हुए अधिकारियों के साथ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) ने शरणार्थी शिविरों से वालंटियरों को लेकर मुक्तिवाहिनी गुरिल्ला प्रशिक्षण शुरू कर दिया। देखते ही देखते भारत समर्थित बांग्लादेशी राष्ट्रवाद की लहर चल पड़ी। (Indira Gandhis Strategy)

पाकिस्तानी मीडिया में भी अमूमन भारत के विरुद्ध सैन्यवादी रुख अपनाया जाने लगा। सितंबर महीना खत्म होने तक पाकिस्तान सरकार समर्थकों ने भारत विरोधी अभियान छेड़ दिया। ‘क्रश इंडिया’ लिखे स्टीकरों को वाहनों के पीछे लगाया जाने लगा।

अक्टूबर आते-आते शेख मुजीबुर्रहमान को निशाना बनाकर ‘हैंग द ट्रेटर’ (देशद्रोही को फ़ांसी दो) स्टीकर दिखने लगे। दिसंबर आते-आते पाकिस्तानी मीडिया में जिहाद जैसी जरूरत बताते हुए सामग्री छपने लगी, जिससे सेना भर्ती आसान हो जाए। (Indira Gandhis Strategy)

अप्रैल 1971 के अंत तक इंदिरा गांधी ने सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ से पाकिस्तान से युद्ध करने की तैयारी के बारे में चर्चा कर ली थी। जनरल सैम मानेकशॉ के निजी अभिलेखों के अनुसार, ”उन्होंने उस वक्त युद्ध में जीत का आश्वासन दिया कि यदि उन्हें आक्रमण उनके तरीके व शर्तों पर करने दिया जाए, जिसे इंदिरा गांधी ने मान लिया।”

इंदिरा गांधी जल्दबाजी में की गई सैन्य कार्रवाई के नुकसान को भांपने के साथ ही सेना के विचार भी जानना चाहती थीं, जिससे मंत्रिमंडल के तेजतर्रार सदस्यों के उत्तर दे सकें और आमजन का भी समर्थन हासिल कर सकें।

नवंबर महीने तक यह महसूस हो गया था कि जंग लगभग तय है। तब सोवियत संघ ने पाकिस्तान को आत्मघाती न उठाने की चेतावनी भी दी। उस वक्त पाकिस्तानी दकियानूसी तत्व और राजनीतिज्ञ लगातार लाहौर समेत कई प्रमुख पाकिस्तानी शहरों में क्रश इंडिया (भारत को कुचल दो) मार्च निकाल रहे थे।

भारत ने पश्चिमी सीमाओं पर बड़े पैमाने पर सेना भेजना शुरू कर दी, लेकिन मानसून वापसी तक इंतजार किया। जिससे हिमालय के दर्रों में हिमपात से आवाजाही बंद हो जाए ओर चीन को बीच में घुसने का मौका न मिले।

23 नवंबर को पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या खान ने पाकिस्तान में आपातकाल घोषित करने के साथ ही जंग के लिए तैयार रहने का ऐलान कर दिया। (Indira Gandhis Strategy)

तीन दिसंबर को शाम लगभग 5 बजकर 40 मिनट पर पाकिस्तानी वायुसेना ने सीमा से 300 मील दूर आगरा समेत उत्तर-पश्चिमी भारत के 11 एयरबेस पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले से पहले ताजमहल को घास-फूस, पत्तियों, बेलों, गंदे कपड़ों से ढांक दिया गया था, क्योंकि उसका संगमरमर पत्थर चांदनी रात में दूर से चमकता था।

पाकिस्तान ने इस हमले को ‘ऑपरेशन चंगेज़ खान’ कहा था। पाकिस्तान ने इजराइल के ‘ऑपरेशन फोकस’ से यह नकल करने की कोशिश की थी। इजराइल-अरब के छह दिवसीय युद्ध में ऑपरेशन फोकस के तहत अरब एयरबेसों पर हमला करने को इजराइल ने बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान भेजे थे, इसमें छोटा सा देश इजराइल अरब देशों से जीत गया था।

इस नकल में एक जगह चूक हो गई, पाकिस्तान ने भारतीय एयरबेसों पर हमला करने को 50 से भी कम फाइटर जेट भेजे। (Indira Gandhis Strategy)

उसी शाम राष्ट्र के नाम संदेश में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा, ”ये हवाई हमले पाकिस्तान की ओर से भारत पर युद्ध की घोषणा हैं।”

उसी रात को भारतीय वायुसेना ने पहली जवाबी एयरस्ट्राइक कर दी। अगले दिन ही इस एयर स्ट्राइक को बड़े हवाई आक्रमण में बदल दिया गया। वायुसेना, नौसेना और थलसेना ने पाकिस्तान पर सभी मोर्चों से हमला बोल दिया।

भारतीय हमले का मकसद पूर्वी मोर्चे पर ढाका पर अधिकार करना और पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान को भारतीय भूमि में घुसने से रोकना था। असाधारण युद्ध प्रदर्शन ने भारतीय सेना में चीन से जंग में खोई प्रतिष्ठा, आत्मविश्वास और गरिमा वापस लौटा दी।

16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेनाओं ने ढाका को घेर लिया और मात्र 30 मिनट में समर्पण कर देने का अल्टीमेटम जारी किया। भारतीय सेना की चेतावनी से घबराकर पूर्वी पाकिस्तान में तैनात लेफ्टिनेंट जनरल आमिर अब्दुल्लाह खान नियाज़ी के नेतृत्व में पाकिस्तानी पूर्वी कमान ने बिना किसी विरोध के आत्मसमर्पण कर दिया।

पाकिस्तान की एकतरफ़ा युद्ध-विराम की घोषणा के बाद पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सेना के युद्धबंदी हो गए, जिसके साथ ही 1971 का भारत-पाक युद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया।

युद्ध समाप्ति के बाद 26 मार्च 1971 को शेख मुजीबुर्ररहमान ने बांग्लादेश के स्वतंत्र देश होने की घोषणा की। तब से बांग्लादेश इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मना रहा है।


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