द लीडर हिंदी : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर स्थित सील वजूखाने की सफाई हो रही है. शनिवार को ज्ञानवापी मस्जिद में पानी की टंकी की सफाई शुरू हुई. बता दें कि सील वजूखाने की सफाई जिलाधिकारी एस. राजलिंगम की देखरेख में सुबह 9:30 बजे से हो रही है. सूत्रों के हवाले से खबर मिली के वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में वजूस्थल पर बने टैंक की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है.
ज्ञानवापी स्थित वजूखाना का पूरा पानी तीन पंप से निकाल दिया गया है .वही सूत्रों के मुताबीक वजूखाना में करीब 15 से 20 मछलियां मरी हुई थीं. उन्हें मत्स्य विभाग की टीम ने निकाल कर बाहर कर दिया है. वही मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव को 20 से 25 जिंदा मछलियां सौंप दी गई हैं. अब वजूखाना की काई और गंदगी साफ करने का काम किया जा रहा है.

बता दें कि वजूखाने की सफाई के लिए नगर निगम ने 26 सफाईकर्मियों की टीम लगाई है. इसके अलावा मत्स्य विभाग और जलकल की टीम भी लगी है. और यह टीम मजिस्ट्रेट की निगरानी में वजूखाने की सफाई का काम कर रही है. वजूखाना का पूरा पानी पंप के सहारे बाहर निकाला जाएगा. इसके बाद उसकी काई और गंदगी को साफ कर उसमें चूने का छिड़काव किया जाएगा.
सुरक्षा यातायात व्यवस्था के कड़े इंतजाम
वहीं सफाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए है. और यातायात व्यवस्था के मद्देनजर काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार के बाहर स्थानीय पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं. गेट नंबर चार पुलिस आयुक्त भी पहुंचे हैं. साफ-सफाई का काम अभी जारी है.वही जिला प्रशासन की तरफ से ज्ञानवापी में मां श्रृंगार गौरी केस के वादी पक्ष और मस्जिद कमेटी के दो-दो प्रतिनिधियों को मौजूद रहने की परमिशन मिली है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर पालिका मत्स्य विभाग समेत 26 सदस्यीय टीम ने सफाई का काम पूरा किया. मौके पर वाराणसी के डीएम मौजूद रहे. इस दौरान CRPF और पुलिस की तगड़ी सुरक्षा रही.
वाराणसी का मुक़दमा क्या है ?
दिल्ली की एक महिला राखी सिंह और चार अन्य महिलाओं ने पिछले साल अगस्त में ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में श्रृंगार गौरी और कुछ अन्य देवी-देवताओं के दर्शन-पूजन की अनुमति की माँग करते हुए एक याचिका दाख़िल की. वाराणसी की एक निचली अदालत में दाख़िल अर्ज़ी में याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि ये देवी-देवता प्लॉट नंबर 9130 में मौजूद हैं जो विवादित नहीं है. अर्ज़ी में कहा गया कि सर्वे कराके पूरे मामले को सुलझाया जाए.
लगभग आठ माह बाद आठ अप्रैल, 2022 को अदालत ने सर्वेक्षण करने और उसकी वीडियोग्राफ़ी के आदेश दे दिए. मस्जिद इंतज़ामिया (प्रबंधन समिति) ने कई तकनीकी पहलुओं के आधार पर इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसे अदालत ने नामंज़ूर कर दिया. सर्वेक्षण के दौरान मस्जिद के वज़ूख़ाने में एक ऐसी आकृति मिली है, जिसके शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद मस्जिद को सील कर दिया गया था. हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में नमाज़ जारी रखने जाने का आदेश सुनाया, हालाँकि वज़ूख़ाना अब भी सील है





