तिब्बती मठ में अब नेपाली छात्र फंदे पर लटका मिला

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द लीडर देहरादून

कई महीनों से विवादों में घिरे देहरादून के एक तिब्बती बौद्ध मठ साक्य सेंटर में एक नेपाली छात्र फंदे से लटका मिला। कुछ समय पहले ही यहां ऐसे ही एक नेपाली शिक्षक की मौत हुई थी। बच्चों की पिटाई का एक वीडियो वायरल होने के बाद 7 छात्र चुपचाप अपने घर नेपाल भाग गए थे। खास बात ये कि नेपाल से छात्रों को यहां तिब्बती नाम दे दिए गए हैं और उन्ही नामों से उनके आधार कार्ड बने हैं।
राजपुर थाने में गत रात सूचना मिली कि साक्य सेंटर मे अध्ययनरत एक युवक ने फांसी लगा ली है। मौके पर पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में लिया। युवक की पहचान कुन्गा तेफिन (25 वर्ष) पुत्र श्री सैन्गपो मूल निवासी नेपाल के रूप में हुई। पुलिस को बताया गया कि युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ था। वह सेंटर में ही अध्ययनरत था। मौके पर कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। शव को कोरोनेशन अस्पताल मोर्चरी में रखवाया गया है। मृतक के परिवारजनों को सूचित कर दिया गया है।

विवाद से रहा नाता

अक्टूबर 2020 में साक्य एकेडमी में पहले नेपाल के कुछ छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आया था। बताया गया था कि यहां के 47 बच्चों ने नेपाल जाने के लिए एकसाथ आवेदन किया था। इस पर एक शिक्षक ने गुस्से में आकर कुछ छात्रों की पिटाई कर दी थी। इनमें से सात बच्चे एकेडमी प्रबंधन को बिना बताए गुपचुप ढंग से भाग गए थे। पिटाई से जख्मी बच्चों के फोटो वायरल हो गए थे। सूचना नेपाल तक पहुंच गई थी। tibbati
इसी बीच मठ (साक्या एकेडमी) के एक शिक्षक ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। उनका शव एकेडमी परिसर स्थित उनके कमरे में फंदे से लटकता हुआ मिला था। आत्महत्या करने वाले शिक्षक लुआंग लेखफा भी  मूल रूप से नेपाल के रहने वाले थे और वह एकेडमी में बौद्ध शास्त्र पढ़ाते थे। मौके से पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें शिक्षक ने एकेडमी से कुछ छात्रों से मारपीट के फोटो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने का जिक्र है। सुसाइड नोट में लिखा था कि एकेडमी के मुख्य गुरुजी ने फोटो वायरल होने पर नाराजगी जताते हुए समूचे स्टाफ को अपने मोबाइल फोन जमा करने को कहा था, लेकिन लेखफा अपना फोन जमा नहीं कर पाए। पुलिस के मुताबिक सुसाइड नोट में लेखफा ने इस पर पछतावा जताते हुए गुरुजी की बदनामी होने का जिक्र किया था। नेपाल में भी इस मामले में हंगामा हुआ तो जांच एस पी स्तर के अधिकारी लोकजीत को सौंपी गई। बताया जा रहा है पर राष्ट्र संबंधों की संवेदनशीलता की वजह से जांच लटकी है।

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