जमीयत ने बाढ़ पीड़ितों को दिए मकान, मौलाना अरशद मदनी बोले-‘श्रीलंका की तबाही से सबक़ लें नफ़रत के सौदागर’

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Maulana Arshad Madani Jamiat
महाराष्ट्र के महाड़ बाढ़ पीड़ितों को मकानों की चाबी सौंपने के कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी. जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ये आवास बनवाकर दिए हैं.

द लीडर : जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने महाराष्ट्र के महाड़ बाढ़ पीड़ितों को उनके नए मकानों की चाबियां सौंपी है. पिछले साल जुलाई में महाड़ में भयंकर बाढ़ आई थी. जिसमें सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे. जमीयत ने यहां लगातार राहत अभियान चलाया. सर्वे के जरिये ऐसे लोगों को चिन्हित किया, सैलाब ने जिनका आशियाना छीन लिया था और फिर उन्हें छत नसीब नहीं हुई. ऐसे 45 पीड़ितों के लिए जमीयत ने मकान बनवाए हैं. इसमें 18 पीड़ित नॉन मुस्लिम हैं. महाड़ के एक कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी ने पीड़ितों को उनके नए घरों की चाबियां दीं, तो परिवार के हर एक शख़्स के चेहरे पर खुशी से ख़िल उठे. (Maulana Arshad Madani Jamiat)

इस दौरान मौलाना अरशद मदनी ने सभा को संबोधित किया. जहां राज्य सरकार के मंत्री, विधायक और मेयर भी रहे. मौलाना ने कहा कि, जमीअत उलमा-ए-हिन्द का गठन 1919 में हुआ था. उस वक़्त जो नियम बनाए गए थे, वे आज तक हैं. इसकी जड़ में देशप्रेम, एकता-अखंडता का संदेश है. आज़ादी से पहले और बाद तक जमीयत अपने नियम और लक्ष्य पर कायम है. लेकिन आज के हालात बड़े चिंताजनक हैं. असम से लेकर दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार और दूसरे राज्यों में हर जगह धार्मिक कट्टरता और नफ़रत का खेल खेला जा रहा है.

हालात विस्फोटक बना दिए गए हैं. लेकिन जमीअत उलमा-ए-हिन्द की बुनियाद और बर्ताव ऐसा नहीं है. हम हर जगह एक ही पैगाम देते हैं कि नफ़रत की आग को आग से नहीं बुझा सकते. बल्कि इसे पानी से ही बुझाया जा सकता है. आज लोग नफ़रत की राजनीति कर रहे हैं. हत्या और तोड़फोड़, मारधाड़ पर आमदा हैं. अपनी राजनीतिक कुर्सी बचाने के लिए हिंदू-मुसलमानों को लड़ा रहे हैं. लेकिन हमारा एक ही लक्ष्य है कि हम धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे. सबसे मुहब्बत करते हैं करते रहेंगे. (Maulana Arshad Madani Jamiat)


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मौलाना मदनी ने कहा कि कार्यक्रम में मंत्री अदिती ताई तटकरे, विधायक भरत सेठ गोगावले और महापौर स्नेहा जगताप की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि हम सब इंसानियत के वजूद के लिए काम करते हैं. इसी मकसद से सब एक साथ बैठे हैं. मौलाना ने कहा कि देश को प्यार-मुहब्बत की ताक़त से ही आज़ादी मिली थी. हिंदू-मुसलमान सभी ने अपनी कुर्बानियां देकर भारत को आज़ाद कराया है.

हम उसी एकता के इतिहास को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. जब तक ज़िंदा हैं चलते रहेंगे. धर्म के नाम पर हिंसा अस्वीकार्य है. धर्म मानवता, सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देता है, इसलिए जो लोग इसका प्रयोग नफ़रत और हिंसा के लिए करते हैं वह अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते. (Maulana Arshad Madani Jamiat)

मौलाना मदनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि नफ़रत से देश तबाह हो जाएगा, पड़ोसी देश श्रीलंका को नफ़रत की राजनीति ने तबाह किया है, नफ़रत के सौदागरों को श्रीलंका से सबक़ लेना चाहिये. हम यह बातें इसलिए कह रहे हैं कि हमें अपने देश से मुहब्बत है और हम इसे फलते-फूलते देखना चाहते हैं. मौलाना मदनी ने दिल्ली में मीडीया के एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि सांप्रदायिक तत्व और देश का कट्टर मीडीया दोनों मिलकर देश की शांति, एकता और यहां की सदियों पुरानी परंपरा से जो ख़तरनाक खिलवाड़ कर रहे हैं. उसने देश भर में एक बार फिर नफ़रत की खाई को बहुत गहरा कर दिया है.

मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि सांप्रदायिक ताकतें नफ़रत की जो चिंगारी भड़काती हैं. मीडीया का एक बड़ा वर्ग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना तरीके और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग से उसे शोला बना देता है. टीवी स्क्रीन पर पत्रकारिता और नैतिक सिद्धांतों का रोज़ ख़ून किया जा रहा है. लेकिन अफ़सोस जिन हाथों में इस समय देश के संविधान के पालन की ज़िम्मेदारी है, उन्होंने अपने कान और आंख बंद कर रखे हैं.

मौलाना मदनी ने आगे कहा कि मीडीया जो कुछ कर रहा है इससे पूरी दुनिया में देश की छवि खराब हो रही है. कुछ मामलों में पहले भी न्याययालय मीडीया के व्यवहार और कैरेक्टर को लेकर सख़्त टिप्पणी और फटकार लगा चुकी है. लेकिन देश का मीडीया ख़ुद को बदलने के लिए तैयार नहीं है. ये दुखद है. (Maulana Arshad Madani Jamiat)

आख़िर में मौलाना ने कहा कि ऐसी मीडीया पर लगाम नहीं कसी गई तो वो दिन दूर नहीं जब पक्षपाती मीडीया अपने इस चरित्र से देश की शांति और एकता को पूरी तरह तबाह कर चुका होगा और तब यह देश की अखण्डता और सहिष्णुता के लिए एक बड़ा ख़तरा बन जाएगा और उस समय तक बहुत देर हो चुकी होगी. मेयर स्नेहा दीदी जगताप, मंत्री अदिति ताई तटकरे और विधायक भरत सेठ गोगावले ने जमीयत उलमा-हिंद के काम की दिल खोलकर तारीफ की.

 


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