झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ED के घेरे में, अवैध खनन मामले में बढ़ रही मुश्किलें

The leader Hindi: केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को समन भेजा है. अवैध खनन को लेकर पीएमएलए (PMLA) के मामले में यह समन भेजा गया है. हेमंत सोरेन को कल पूछताछ के लिए बुलाया गया है. ईडी इस मामले में सोरेन के सहयोगी पंकज मिश्रा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.जांच एजेंसी ने 8 जुलाई को झारखंड में सोरेन के सहयोगी पंकजv मिश्रा और उनके व्यापारिक सहयोगियों से जुड़े 18 ठिकानों पर भी छापेमारी की थी.साहिबगंज में छापेमारी के दौरान ईडी के हाथ पंकज मिश्रा के घर से एक लिफाफा लगा था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लिफाफे में मुख्यमंत्री के बैंक खाते से जुड़ा चेकबुक था.

इसमें दो चेक पर साइन भी किए गए थे. इसके अलावा, प्रेम प्रकाश के घर से मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों के नाम आवंटित दो एक-47 और 60 गोलियां भी ईडी ने जब्त की थी. वहीं जिस दौरान पंकज मिश्रा रिम्स में भर्ती था, उस दौरान फोन पर अधिकारियों से बात करने और मुख्यमंत्री के नाम पर उन्हें डराने के प्रमाण भी ईडी को मिले हैं. ईडी के हाथ ऐसे सबूत लगे हैं जिससे यह पता चलता है कि पंकज मिश्री और उसके सहयोगी अवैध खनन के मामले में जिले के अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम पर डराते थे.

ईडी ने इस साल मार्च में पंकज मिश्रा और अन्य के खिलाफ पीएमएलए शिकायत दर्ज की थी, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने “अवैध रूप से अपने पक्ष में बड़ी संपत्ति अर्जित की है.” इसके बाद ईडी ने छापेमारी की और मिश्रा के कुल 37 बैंक खातों में जमा किए 11.88 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए सरकारी एजेंसी ने 5.34 करोड़ रुपये की “बेहिसाब मुद्रा” भी जब्त की. ईडी ने दावा किया कि यह धन झारखंड में अवैध खनन से संबंधित था. इसके अलावा, अवैध रूप से चल रहे पांच स्टोन क्रशर और इतनी ही संख्या में अवैध बंदूक कारतूस जब्त किए गए.इससे पहले, जांच एजेंसी ईडी ने पंकज मिश्रा को 19 जुलाई, 2022 को, बच्चू यादव को 4 अगस्त को और प्रेम प्रकाश को 25 अगस्त को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार आरोपी व्यक्ति वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं. ईडी ने पंकज मिश्रा और अन्य के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत बरहरवा पुलिस स्टेशन, साहेबगंज जिला, झारखंड में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. बाद में, आईपीसी, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज अवैध खनन के संबंध में कई एफआईआर को भी अनुसूचित अपराधों के दायरे में लिया गया है.

 

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