नेपाल में आम हड़ताल, 157 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

0
317

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा विभिन्न संवैधानिक निकायों के पदाधिकारियों और सदस्यों की नियुक्ति का विरोध नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ गुट के नेतृत्व में राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल से नेपाल में सामान्य जनजीवन पंगु हो गया। हड़ताल करने वाले प्रचंड समर्थक 157 प्रदर्शकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

हड़ताल के दौरान परिवहन सेवाएं, प्रमुख बाजार, शैक्षणिक संस्थान, कार्यालय और कारखाने बंद रहे। सरकार ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए काठमांडू घाटी में लगभर 5000 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया था।

यह भी पढ़ें – नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने भारत से कालापानी समेत दो अन्य क्षेत्र वापस लेने का लिया संकल्प

गिरफ्तार होने वालों में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य अष्ट लक्ष्मी शाक्य, हिमाल शर्मा और अमृता थापा भी हैं। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने हड़ताल के दौरान काठमांडू में तीन वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

नेपाल पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बसंत कुंवर ने संवाददाताओं को बताया, “काठमांडू घाटी से आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि शेष 77 को घाटी के बाहर से गिरफ्तार किया गया।”

मेट्रोपॉलिटन ट्रैफिक पुलिस काठमांडू के अनुसार, सुबह-सुबह गोंगबाबू बस पार्क के पास प्रदर्शनकारियों द्वारा एक टैक्सी में आग लगा दी गई। एक अन्य टैक्सी और एक माइक्रो बस को काठमांडू के बाहरी इलाके में निशाना बनाया गया।

यह भी पढ़ें – प्रधानमंत्री मोदी ने नहीं दिया नेपाल विदेशमंत्री को मिलने का समय

राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने बुधवार सुबह 11 संवैधानिक निकायों में 32 पदाधिकारियों के रूप में नियुक्त किया। बुधवार को ही मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा ने राष्ट्रपति भंडारी की उपस्थिति में विभिन्न संवैधानिक निकायों में लगभग चार दर्जन लोगों को पद की शपथ दिलाई। प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने आरोप लगाया है कि उन्हें असंवैधानिक तरीके से नियुक्त किया गया।

प्रचंड गुट के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कार्यवाहक ओली सरकार द्वारा विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं के पदाधिकारियों और सदस्यों की नियुक्ति को असंवैधानिक करार दिया।

”यह सरकार की निरंकुशता है। कार्यवाहक सरकार को नई नियुक्तियां करने और कैबिनेट में फेरबदल करने का कोई अधिकार नहीं है”, प्रधानमंत्री ओली के कैबिनेट फेरबदल की ओर इशारा करते हुए श्रेष्ठ ने कहा।

20 दिसंबर को नेपाल राजनीतिक संकट में पड़ गया। कार्यवाहक प्रधानमंत्री पर चीन की ओर झुकाव का आरोप है। उन पर आरोप है कि आश्चर्यजनक तरीके से संसद भंग करके उन्होंने प्रचंड के हाथ में सत्ता जाने से रोक दी।

यह भी पढ़ें – नेपाल की संसद भंग, मध्यावधि चुनाव के ऐलान से सियासी भूचाल

275 सदस्यीय सदन को भंग करने के उनके कदम ने प्रचंड की अगुवाई वाले एनसीपी के एक बड़े हिस्से ने इस पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने काठमांडू सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन रैलियां करके नाराजगी जाहिर की।

ओली एनसीपी के एक धड़े के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, ”उन्हें यह जानकर सदन भंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा कि प्रचंड के नेतृत्व वाला गुट उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर करने और राष्ट्रपति भंडारी के खिलाफ महाभियोग लाने की योजना बना रहा है।”

ओली के नेतृत्व वाले सीपीएन-यूएमएल और प्रचंड के नेतृत्व वाले नेकपा (माओवादी सेंटर) का मई 2018 में विलय हो गया, ताकि 2017 के आम चुनावों में उनके गठबंधन की जीत के बाद एक एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here