गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस की जबरदस्त घेराबंदी के बीच किसान नेता टिकैत अड़े

द लीडर : किसान आंदोलन के रणनीति स्थल-सिंघु बॉर्डर के बजाय अचानक नजरें गाजीपुर बॉर्डर पर आ टिकी हैं. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत यहीं धरने पर बैठे हैं. उन्होंने मंच से ऐलान किया कि आंदोलन खत्म नहीं होगा. पुलिस-प्रशासन जो चाहें, उनका हश्र कर दे. भावुक होते हुए यहां तक कह गए कि कानून वापस न हुए तो आत्महत्या कर लूंगा. (Farmer Leader Tikait Ghazipur Border)

गाजीपुर बॉर्डर पर गुरुवार की दोपहर से हलचल बढ़ी है. यहां भारी संख्या में पुलिस, पीएससी उतारी गई है. गाजियाबाद प्रशासन ने किसानों से सड़क खाली करने कह दिया है. अफसरों की ये सक्रियता यूपी सरकार के उस आदेश के बाद बढ़ी, जिसमें सरकार ने राज्य के सभी स्थानों से किसान आंदोलन खत्म कराने को कहा है. पुलिस की इस घेराबंदी को देखते हुए किसनों की बेचैनी बढ़ गई है.

गाजीपुर बॉर्डर की ओर जाती यूपी पुलिस. फोटो, साभार ट्वीटर

राकेश टिकैत को 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा को लेकर गुरुवार को लुक आउट नोटिस मिला है. इसके बाद से ही यूपी और दिल्ली पुलिस आंदोलन स्थल के पास तैनात है. परिस्थितयों को देखते हुए राकेश टिकैत ने किसान नेताओं के साथ बैठक की. और आंदोलन खत्म न करने का अपना फैसला सार्वजनिक किया है.

पत्रकारों से बात करते हुए वे भावुक हो गए. सरकार पर आंदोलन को तबाह करने और किसानों के साथ मारपीट किए जाने की आशंका भरा आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस चाहें तो गोली चला दे. वे यहां से हटने वाले नहीं हैं. उन्होंने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं.


बॉर्डर पर इतनी फोर्स तो, क्या आज की रात किसान आंदोलन की आखिरी रात होगी!


 

इस ताजा घटनाक्रम को लेकर गाजीपुर बॉर्डर ने लोगों का ध्यान खींचा है. इससे पहले बुधवार की रात को इसी आंदोलन स्थल की बिजली काट दी गई थी और पानी की सप्लाई रोकी जा चुकी है.

दो किसान संगठनों का किनारा

बढ़ती सख्ती को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर बिजली-पानी जैसी सुविधाएं बंद कर दी गई हैं. अब हम यहां बैठकर क्या करेंगे? उठ ही जाएंगे.

वहीं, किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि जब तक सांस चलेगी, लड़ेंगे. अभी हमारी कोई योजना नहीं है. पता नहीं सरकार क्या-क्या साजिश करती है. दरअसल, तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का आज 64वां दिन है. दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान कानून वापसी की मांग को लेकर डटे हैं.

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