पाकिस्तान में मंदिर पर हमले के आरोप में मुस्लिम नेता समेत दर्जनों गिरफ्तार, पुनर्निर्माण कराएगी प्रांतीय सरकार

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा प्रांत की राजधानी पेशावर से लगभग 100 किमी (62 मील) दक्षिण-पूर्व में काराक शहर में श्री परमहंस जी महाराज समाधि मंदिर पर बुधवार को हुए हमले में शामिल होने के आरोप में स्थानीय मुस्लिम नेता सहित दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रांतीय सरकार राजकीय कोष से मंदिर का पुनर्निर्माण कराएगी। शुक्रवार को ये जानकारी खैबर पख्तूनवा के सूचना मंत्री कामरान बंगश ने दी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से जुड़े सूचना मंत्री बंगश ने कहा, “हमें हमले से हुए नुकसान का अफसोस है। मुख्यमंत्री ने मंदिर और आसपास ठहरने की जगह के पुनर्निर्माण का आदेश दिया है। हिंदू समुदाय के सहयोग से निर्माण जल्द से जल्द शुरू हो जाएगा।”

जिला पुलिस प्रमुख इरफानुल्ला खान ने इंटरनेशनल मीडिया को बताया कि वारदात के सिलसिले में 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें एक स्थानीय मुस्लिम नेता मुल्ला शरीफ शामिल है। उस पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। पुलिस को पाकिस्तान के सबसे बड़े इस्लामिक दलों में से एक जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के जिला नेता मुल्ला मिर्ज़ा अकीम की भी तलाश है।

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बृहस्पतिवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भी अधिकारियों से मंदिर विध्वंस पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों ने घटनाक्रम की निंदा की। सिंध प्रांत की राजधानी कराची में, जहां देश के अधिकांश हिंदू रहते हैं, 200 से अधिक लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय के बाहर विरोध कर न्याय की मांग की।

“आपको दूसरे लोगों के धर्म का सम्मान करना चाहिए। हम पाकिस्तानी हैं, और भगवान के लिए, किसी को भी हमें निष्ठा का प्रमाण पत्र देने की आवश्यकता नहीं है ”, सिंध की प्रांतीय विधानसभा की हिंदू सदस्य मंगला शर्मा ने कहा।

देश के धार्मिक मामलों के मंत्री नूरुल हक कादरी ने इस हमले को “सांप्रदायिक सद्भाव के खिलाफ एक साजिश” कहा। उन्होंने गुरुवार को ट्विटर पर कहा, अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के पूजा स्थलों पर हमले इस्लाम में निषिद्ध हैं और “अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा हमारी धार्मिक, संवैधानिक, नैतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है”।

इससे पहले बुधवार को पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह “हमारे सभी नागरिकों और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे”। प्रधानमंत्री खान ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया है।

“मैं अपने लोगों को चेतावनी देना चाहता हूं कि पाकिस्तान में कोई भी हमारे गैर-मुस्लिम नागरिकों या उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाएगा तो सख्ती से निपटा जाएगा। अल्पसंख्यक इस देश के समान नागरिक हैं, ” खान ने फरवरी में ट्वीट किया था।

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यहां बता दें, 1997 में इसी तरह की परिस्थितियों में नष्ट हुए मंदिर का पुनर्निर्माण 2015 में शीर्ष अदालत के निर्देशन में किया गया था। घटनाक्रम वाले क्षेत्र में कोई हिंदू नहीं रहता, अनुयायी अक्सर हिंदू संत श्री परमहंस को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मंदिर जाते हैं। संत परमहंस का देहांत 1947 में भारत विभाजन से पहले ही हो चुका था, जिस विभाजन ने पाकिस्तान को जन्म दिया।

परमहंस मंदिर के नवीनीकरण के विरोध में 30 दिसंबर को लगभग 1500 लोग सुदूर गांव में मंदिर पर हमला किया था। हमलावर भीड़ ने इमारत को आग लगाने से पहले दीवारों हथौड़ों से तोड़कर नेस्तनाबूद कर दिया था।

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