बरेली में दूसरे संप्रदाय की ज़मीनें क़ब्ज़ाने वाले गिरोह का भंडाफोड़

बरेली में 25 करोड़ के प्लॉट क़ब्ज़े से वापस, हवा के मिजाज़ को भांपने वाले यूपी के ज़िला बरेली में बड़ी भूल कर गए. करोड़ों बनाने के खेल में सारी गोटें ठीक से फिट कीं लेकिन पुलिस कप्तान अनुराग आर्य से मात खा गए. भूल कर गए कि नीचे वालों से मिलकर बरेली में बड़ा खेल कर जाएंगे. उनका यह दुस्साहस उन्हें जेल की सलाख़ों के पीछे ले गया है. बरेली में ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो दूसरे संप्रदाय की क़ीमती ज़मीनों पर बेहद सुनियोजित तरीक़े से क़ब्ज़ा करने की कोशिश में लगा था बल्कि कर भी चुका था. इस गैंग का लीडर चंकबंदी विभाग का निलंबित लेखपाल सावन कुमार जायसवाल है. गैंग में अनुसूचित जाति की कुछ महिलाओं को भी शामिल किया गया था, जिन्हें ज़रूरत पड़ने पर हंगामे के लिए आगे कर दिया जाता था. इस तरह से करोड़ों के प्लॉटों पर क़ब्ज़े का यह मामला बहुत बड़ा और नये तरीक़े का है. पहले आपको बताते हैं कि इस गैंग ने किन-किनके प्लॉट पर क़ब्ज़ा किया और कैसे यह गैंग बेनक़ाब हुआ.

पीलीभीत बाईपास पर सतीपुर में आनंद विहार कॉलोनी है. इस कॉलोनी में पहले नुसरत जहां के प्लॉट पर क़ब्ज़ा किया गया. उसके लिए चकबंदी के निलंबित लेखपाल सावन कुमार ने फर्ज़ी क़ाग़ज़ात तैयार किए. अपने ही साथियों में से एक को वारिस बनाकर दूसरे साथी के नाम बैनामा किया. उसके बाद कोर्ट भी पहुंच गए. इस आधार पर प्लॉट कर क़ब्ज़ा कर लिया गया. थाने की पुलिस से सांठगांठ करके दीवार भी खड़ी कर दी. जब नुसरत जहां ने यह कहते हुए कि असली मालिक के होते हुए कैसे फ़र्ज़ी को क़ब्ज़ा करा देंगे तो पुलिस ने उन्हें धमकाया था. ख़ैर नवादा शेख़ान की रहने वाली नुसरत जहां ने हार नहीं मानी वो सिविल जज के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट गईं. एसएसपी अनुराग आर्य से मिलकर अपनी बात रखी.

इस बीच नुसरत जहां कि तरह ही इस गैंग ने बेंत फर्नीचर कारोबारी मुहम्मद इलियास के प्लॉट पर भी क़ब्ज़ा कर लिया. जब उन्होंने पुलिस से शिकायत की अपने सारे पेपर दिखाए. बताया कि प्लृॉट उनकी पत्नी शाहीन बेगम के नाम है तो पुलिस ने उलटे उन्हें और उनके पैरोकारों को उठाकर थाना बारादरी में बैठा लिया. वो चिल्लाते रहे कि प्लॉट बीडीए से एप्रूव्ड है. सभी विभागों की एनओसी उनके पास है लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई. आख़िरकार एसएसपी के संज्ञान लेने के बाद गैंग की उलटी गिनती शुरू हो गई. एसपी सिटी मानुष पारीक ने जांच शुरू कर दी. थाना बारादरी में नुसरत जहां और मुहम्मद इलियास की तरफ से सुनील कुमार, सावन कुमार जायसवाल समेत पांच के ख़िलाफ़ दो मुक़दमे दर्ज हो गए. पुलिस ने तीनों को उठा लिया. उन्हें जेल भेजने के बाद उनसे मिलीभगत करने वाले इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज और हेड कांसटेबिल की शामत आई.

एसएसपी ने एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट पर बारादरी थाने के इंस्पेक्टर सुनील कुमार, सैटेलाइट चौकी प्रभारी राजीव कुमार शर्मा, हेड कांसटेबिल अनिल कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया. इस तरह एसएसपी ने भूमाफ़ियाओं के साथ महकमे में छुपी काली भेड़ों को भी सबक़ सिखाया है. बता दिया है कि पीलीभीत बाईपास पर फायरिंग करके दहशत फैलाने वाले बिल्डर राजीव राणा और आदित्य उपाध्याय पर कार्रवाई वक़्त की नज़ाकत नहीं थी, ऐसा दुस्साहस दिखाने या कोशिश करने वालों के लिए साफ संदेश था कि क़ानून से खिलवाड़ पर बच नहीं पाएंगे. निलंबित लेखपाल सावन कुमार और उसके गैंग से यही चूक हुई. यह सोचकर दूसरे संप्रदाय की ज़मीनों पर हाथ डाला कि शिकायत पर शायद उनकी सुनवाई नहीं होगी. सावन कुमार और उसके गुर्गों को उनकी यह सोच महंगी पड़ गई. दो मामले खुल गए. अभी इस तरह के तीन मामले खुलने से रह गए हैं. उनमें भी ऐसे ही क़ब्ज़े किए गए हैं. जिनमें एक प्लॉट मुर्तज़ा मियां का बताया जा रहा है.

  • Abhinav Rastogi

    पत्रकारिता में 2013 से हूं. दैनिक जागरण में बतौर उप संपादक सेवा दे चुका हूं. कंटेंट क्रिएट करने से लेकर डिजिटल की विभिन्न विधाओं में पारंगत हूं.

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