म्यांमार में हवाई हमले, थाईलैंड की सीमा पर शरणार्थी, भारत सतर्क

 

यंगून।

म्यांमार की सेना द्वारा हवाई हमले के बाद सोमवार को करेन गांव के हजारों लोग भागकर थाईलैंड से लगी सीमा पर जा रहे हैं और वहां मौजूद थाई अधिकारी इसके लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। मानवीय सहायता के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ‘फ्री बर्मा रेंजर्स’ के मुताबिक म्यांमार के विमानों ने रविवार को रात भर हवाई हमले किए।
एजेंसी के एक सदस्य ने बताया कि हमले में एक बच्चा घायल हुआ है लेकिन किसी की मौत नहीं हुई। थाई प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओछा ने सोमवार को कहा कि वह देश की पश्चिमी सीमा पर समस्याओं से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भारी संख्या में लोगों के आने के मद्देनज़र तैयारी कर रही है।
प्रयुत ने कहा, “हम अपने क्षेत्र में सामूहिक प्रवास नहीं चाहते लेकिन हम मानवाधिकारों के लिए चिंतित हैं।” थाईलैंड में पहले से ही घुस चुके लोगों के बारे में पूछे जाने पर प्रयुत ने कहा, “हमने कुछ स्थानों पर तैयारी की है लेकिन शरणार्थी केंद्रों के बारे में हम अभी कुछ नहीं कह सकते। हम अभी वहां तक नहीं पहुंचे हैं।”
बर्मा फ्री रेंजर्स के अनुसार, दो सौ छात्रों समेत लगभग ढाई हजार लोग सलवीन नदी पार कर उत्तरी थाईलैंड के माए होंग सोन प्रांत में प्रवेश कर चुके हैं। एजेंसी ने कहा कि म्यांमार के उत्तरी करेन राज्य में लगभग दस हजार लोग विस्थापित हो गए हैं।

भारत सतर्क

म्यांमार में जारी सियासी व सैन्य संकट के चलते एक बार पुन: वहां के नागरिक भारत में शरणार्थी बनकर घुसने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में मणिपुर सरकार ने अपने सीमावर्ती जिलों को निर्देश दिया है कि वह उन्हें देश में न घुसने दे। शरणार्थियों के लिए न राहत शिविर बनाएं न खाने-पीने के इंतजाम करें। वे शरण मांगने आएं तो उन्हें हाथ जोड़कर वापस भेजें। मणिपुर से मीडिया रिपोर्ट मिली है कि राज्य के गृह विभाग ने सीमावर्ती जिलों चंदेल, तेंगनोपाल, कामजोंग, उकरूल, चूड़ाचंद्रपुर के प्रशासन से कहा है कि वह राज्य में म्यांमार के लोगों के अवैध प्रवेश पर नजर रखे और उन्हें रोकने के उचित कदम उठाए।

1643 किलोमीटर लंबी है भारत से लगी सीमा

म्यांमार से लगी भारत की करीब 1643 किलोमीटर लंबी सीमा है। फरवरी में हुए तख्तापलट के बाद से वहां सैन्य शासन व जनता के बीच लगातार टकराव चल रहा है। 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सेना के दमनकारी रवैये के कारण बड़े पैमाने पर लोगों के देश छोड़ने व शरणार्थी बन दूसरे देशों में घुसने की आशंका है। ऑनलाइन न्यूज सर्विस म्यांमार नाऊ के मुताबिक, शनिवार को सुरक्षा बलों के हाथों कम से कम 114 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई, जिनमें बहुत सारे 16 साल के कम उम्र के बच्चे थे।

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