अब्दुल्ला आज़म का क़िस्सा तमाम होने के बाद क्या भाजपा क्लोज़ रहने देगी नवाबों का सियायी चैप्टर

The Leader. 15 साल पुराने जिस मामले में अब्दुल्ला आज़म को दो साल की सज़ा हुई तब वो क़रीब 17 साल के होंगे. यानी बालिग़ भी नहीं हुए थे. अपने वालिद मुहम्मद आज़म ख़ान के साथ दिल्ली की तरफ जा रहे थे. रास्ते में मुरादाबाद के थाना छजलैट की पुलिस चेकिंग कर रही थी. आज़म ख़ान का पुलिस से विवाद हुआ और मुरादाबाद हरिद्वार हाईवे जाम कर दिया गया. जाम खुलने के बाद पुलिस ने मुक़दमा दर्ज लिया था. अमरोहा के विधायक महबूब अली, पूर्व विधायक हाजी इकराम क़ुरैशी समेत सात नेता को मुरादाबाद की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट ने बरी कर दिया. आज़म ख़ान और अब्दुल्ला आज़म को दोषी ठहराते हुए दो-दो साल की अधिकतम सज़ा सुनाई. इससे अब्दुल्ला आज़म की विधायकी चली गई है. यानी अब आज़म ख़ान के परिवार में 1996 के बाद पहला मौक़ा है, जब कोई फ़र्द किसी एवान का सदस्य नहीं रहा है.


मुहम्मद आज़म ख़ान सियासत के अर्श से फ़र्श तक


मुहम्मद आज़म ख़ान की विधायकी पहले ही भड़काऊ भाषण देने के मामले में जा चुकी है. उनसे चुनाव लड़ने और वोट डालने तक का अधिकार छिन गया है. यह सब कार्रवाई का सामना अब उनके बेटे अब्दुल्ला को भी करना पड़ रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आज़म ख़ान के पास सियासत में बने रहने का रास्ता क्या बचा है. स्वार सीट पर उपचुनाव होगा, अब्दुल्ला लड़ नहीं सकते. पत्नी को लड़ाएंगे नहीं, क्योंकि दो जन्म प्रमाण-पत्र के मामले में उन पर भी मुक़दमा है. वो इस मामले में आज़म ख़ान और अब्दुल्ला आज़म के साथ जेल भी जा चुकी हैं. इस मुक़दमे में भी जल्द फैसला आने की संभावना बनी हुई है. अब बचे उनके बड़े बेटे अदीब आज़म ख़ान और बहू सिदरा. आज़म ख़ान बड़े बेटे को राजनीति में नहीं लाए हैं. रहीं बहू सिदरा को आने नहीं देना चाहते. अब्दुल्ला की अभी शादी नहीं की है. अब या तो अब्दुल्ला शादी करें और पत्नी को चुनाव मैदान में उतारें. बड़ी संभावना यह भी है कि जिस तरह भाजपा मे रामपुर में आज़म ख़ान की विधायकी जाने पर उपचुनाव जीता, उसे देखते हुए स्वार के उपचुनाव से हट जाएं.


ख़ानदान-ए-आला हज़रत के सबसे पावरफ़ुल दामाद सलमान हसन को बहुत भारी पड़ गई यह एक मुलाक़ात


ख़ैर यह आज़म ख़ान को तय करना है. फ़िलहाल मुरादाबाद कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद वो ख़ामोश हैं. अब क्या फ़ैसला लेंगे यह वक़्त बताएगा. उससे पहले उनके विरोधी रामपुर के विधायक आकाश सक्सेना उर्फ हनी, नवाब ख़ानदान के पूर्व विधायक क़ाज़िम अळी ख़ान उर्फ नवेद मियां मुखर हैं. आज़म ख़ान को लेकर दोनों ने बयान जारी करते हुए तीखा हमला बोला है. नवेद मियां ने तो यहां तक भविष्याणी कर दी है कि रामपुर, स्वार के बाद अब चमरौआ सीट भी जाएगी. यहां से आज़म ख़ान के ख़ास कहलाने वाले नसीर ख़ान विधायक हैं. उन पर भी मुक़दमे दर्ज हैं. मामला कोर्ट में चल रहा है. ख़िलाफ़ फ़ैसला आने के बाद नसीर ख़ान को भी दिक़्क़त का सामना करना पड़ सकता है. हमेशा ही चर्चाओं में रहने वाले रामपुर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब्दुल्ला के बाद अब कौन और नवाब ख़ानदान की वापसी होगी या भाजपा आज़म ख़ान के साथ नूरमहल का चैप्टर क्लोज़ ही रहने देगी. बता दें कि नूरमहल नवाब ख़ानदान की कोठी का नाम है, जो पांच बार रामपुर से सांसद रहे नवाबज़ादा ज़ुल्फ़िक़ार अली ख़ान उर्फ मिक्की, उनकी बेगम दो बार की सांसद रहीं नूरबानो, पांच बार विधायक रहे उनके बेटे क़ाज़िम अली ख़ान उर्फ नवेद मियां की रिहाईश है.