दिलीप कुमार का 172 करोड़ का बंगला, और लज़ीज़ आलू गोश्त- पढ़ें इन साइड स्टोरी

द लीडर हिंदी : मुहम्मद युसूफ़ ख़ान दिलीप कुमार. वो क्या नहीं थे. कमाल के अभिनेता, लाजवाब इंसान. बेहद हैंडसम, शानदार शख़्सियत, जानदार आवाज़, मेहमान नवाज़, ग़रीब परवर, इल्म का समंदर, उड़ान आसमान पर रही लेकिन क़दम ज़मीन पर थे. जिनके लिए सदी के महानायक अमिताब बच्चन ने कहा-जब भी भारतीय सिनेमा का इतिहास लिखा जाएगा, हमेशा ‘दिलीप कुमार से पहले और दिलीप कुमार के बाद’ लिखा जाएगा. ये वो एक नाम है, जो ज़ुबां पर आते ही उनके लिए न जाने कितने लक़ब और पर्सनाल्टी के शानदार रंग ज़हन में तैरने लगते हैं. मुंबई के पाली हिल में समुद्र के किनारे बसे बंगले के दर-ओ-दीवार दिलीप साहब की न भुलाई जा सकने वाली बेगिनती यादों के गवाह हैं. जहां जाने वाला चाहे कोई हो खाने के वक़्त पर बग़ैर खाए कभी नहीं लौटा. दिलीप साहब हाथ पकड़कर बैठा लिया करते थे.

भूख नहीं भी लग रही हो तो एक-दो रोटी खिला ही देते थे. जहां का आलू गोश्त इतना लज़ीज़ होता था, जिसका ज़ायका पदमश्री अंजुमन इस्लाम के अध्यक्ष डॉ. ज़हीर क़ाज़ी को आज भी नहीं भूल पाए हैं. वही यादगार बंगला रीडेवलपमेंट के लिए 172 करोड़ में बेच दिया गया है. हमारे मुंबई रिपोर्टर अमजद ख़ान ने इस बंगले की यादगार यादों को लेकर डॉ. क़ाज़ी से बात की. आपको बताएंगे कि इस बंगले की दिखावट आने वाले वक़्त में बदल जाने वाली है.दिलीप साहब का बंगला 2,000 वर्ग मीटर के बड़े एरिया में फैला हुआ है. यह उनके पास दशकों तक रहा.

यहीं रहते हुए उन्होंने देवदास, नया दौर जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं. रीडेवलपमेंट में 10-11 मंजिला लग्‍जरी इमारत में दिलीप कुमार को समर्पित एक म्यूज़ियम भी शामिल होगा. 3200 से 7000 वर्ग फुट आकार के लगभग 15 लक्जरी अपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं, जिनकी कीमत 1.3 से 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट है. प्रोजेक्ट के 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है और इससे 900 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जेनरेट होगा. इस बंगले को सितंबर 1953 में दिलीप कुमार ने अब्दुल लतीफ से खरीदा था. बताते हैं कि 1966 में सायरा बानो से शादी करने के बाद दिलीप कुमार ने अपना बंगला छोड़ दिया और उनके घर में रहने चले गए. उनके दो भाई इसी बंगले में रहते रहे.https://theleaderhindi.com/on-neet-ug-issue-supreme-court-said-paper-leak-issue-is-not-a-systematic-failure/

Abhinav Rastogi

पत्रकारिता में 2013 से हूं. दैनिक जागरण में बतौर उप संपादक सेवा दे चुका हूं. कंटेंट क्रिएट करने से लेकर डिजिटल की विभिन्न विधाओं में पारंगत हूं.

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