भारतीय फुटबॉल के पोस्टर बॉय ने लिया इंटरनेशनल करियर से रिटायरमेंट

द लीडर हिंदी: भारतीय फुटबॉल के पोस्टर बॉय और टीम के कप्तान सुनील छेत्री ने गुरुवार को संन्यास लेने का ऐलान किया है. 6 जून को कोलकाता में कुवैत के खिलाफ फीफा विश्व कप क्वालीफाइंग मैच उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच होगा.वह आख़िरी बार फ़ीफ़ा विश्व कप क्वॉलिफ़िकेशन मैच में कुवैत के ख़िलाफ़ खेलते नज़र आएंगे. भारतीय टीम इस समय दूसरे राउंड की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर है. वह अगर अपनी टीम को तीसरे राउंड में स्थान दिला सकें तो यह उनके करियर की बड़ी सौगात हो सकती है.

बतादें 2005 में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में डेब्यू करने वाले सुनील छेत्री ने भारत के लिए 94 गोल किए हैं. बता दें सुनील छेत्री ने सोशल मीडिया पर 10 मिनट का वीडियो जारी करके अपने रिटायरमेंट का एलान किया है.इसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने रिटारमेंट की सबसे पहले जानकारी अपने माता-पिता और पत्नि को दी. बता दें इस खबर को सुनकर पिता तो ख़ुश थे लेकिन माता और पत्नि रोने लगी.

सुनील ने कहा कि “मैंने माता और पत्नि के रोने पर कहा कि अब मैं भारत के लिए कभी नहीं खेलूंगा, तो वह दोनों रो क्यों रही हैं. असल में सुनील जब भी भारत के लिए खेलते थे, तो वह दोनों दबाव महसूस करतीं थीं. इस पर ही सुनील का कहना था कि अब उनके ऊपर कोई दबाव नहीं रहेगा.भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉलरों में शुमार किए जाने वाले सुनील छेत्री का जन्म तीन अगस्त 1984 को सिकंदराबाद में हुआ था और ज़्यादातर बचपन दार्जिलिंग में बीता है.

बता दें पिता केबी छेत्री सेना की इलेक्ट्रिकल और मैकेनल कोर में अधिकारी थे और सेना की फ़ुटबॉल टीम में खेला करते थे. वहीं माता सुशीला भी अपनी जुड़वा बहन के साथ नेपाल की राष्ट्रीय महिला फ़ुटबॉल टीम में खेली थीं. इस कारण फ़ुटबॉल सुनील के ख़ून में ही समाई है.यही वजह है कि वह बहुत ही छोटी उम्र में फ़ुटबॉल खेलने लगे और दार्जिलिंग के बेथनी स्कूल में पढ़ने के दौरान ही टूर्नामेंटों में खेलने लगे थे. पर सुनील के करियर को सही दिशा 2002 में मोहन बागान क्लब से जुड़ने पर ही मिली.

बतादें 39 वर्षीय सुनील छेत्री ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 19 सालों में उन्होंने जो अनुभव किया है, वह “ड्यूटी, प्रेशर और अपार खुशी का एक बेहतरीन मिश्रण” रहा है.

उन्होंने भावुकता से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं देश के लिए खेले गए मैचों को लेकर सोचूंगा कि मैंने क्या अच्छा और क्या बुरा किया. लेकिन पिछले डेढ़-दो महीनों में, ऐसा सोचकर मुझे अजीब लगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं यह फैसला ले रहा था कि अगला मैच मेरा आखिरी होगा.

Abhinav Rastogi

पत्रकारिता में 2013 से हूं. दैनिक जागरण में बतौर उप संपादक सेवा दे चुका हूं. कंटेंट क्रिएट करने से लेकर डिजिटल की विभिन्न विधाओं में पारंगत हूं.

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