रायगढ़ भूस्खलन: मलबे से निकाले गए 12 शव, बारिश से मुश्किल हुआ रेस्क्यू, अमित शाह ने शिंदे से की बात

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रायगढ़: महाराष्ट्र के रायगढ़ में भूस्खलन के चलते अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे के नीचे दबे शव निकाले जा रहे हैं। हालांकि लगातार बारिश होने और मिट्टी गिरने के चलते रेस्क्यू में मुश्किलें आ रही हैं। बुधवार रात करीब 11 बजे मुंबई से लगभग 80 किमी दूर खालापुर तहसील के इरशालवाड़ी गांव में तेज बारिश के चलते भूस्खलन आया था। स्थिति का जायजा लेने सीएम एकनाथ शिंदे गुरुवार सुबह घटनास्थल पर पहुंचे थे। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सीएम से बात करके राहत कार्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बचाव कार्य में लगे कर्मियों से बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘अब तक, खोज और बचाव टीम ने 12 शव बरामद किए हैं। कम से कम 103 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जो वहां रह रहे थे। उनमें से कुछ धान के खेतों में काम के लिए बाहर गए थे और कुछ बच्चे आवासीय स्कूलों में थे। उन लोगों की तलाश की जा रही है ।’

वहीं अमित शाह ने भी सीएम से बात कर रेस्क्यू की जानकारी ली। उन्होंने ट्वीट किया, ‘महाराष्ट्र के रायगढ़ में तेज बारिश से हुए भूस्खलन के संबंध में मैंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से बात की। एनडीआरएफ की चार टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है और स्थानीय प्रशासन के साथ बचाव कार्यों में जुटी है। लोगों को वहां से निकालना व घायलों को तुरंत उपचार देना हमारी प्राथमिकता है।’ स्थिति अभी भी सुधरी नहीं है। लगातार बारिश होने के चलते रेस्क्यू में मुश्किल आ रही है। साथ ही भूस्खलन के चलते मिट्टी भी गिर रही है। घटनास्थल पर एनडीआरएफ की चार टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं। अधिकारियों ने बताया कि गांव में करीब 50 मकान हैं, जिनमें से 17 मकान बारिश के बाद आए भूस्खलन के कारण दब गए हैं। अभी भी कई लोगों के भी फंसे होने की आशंका है। इरशालवाड़ी गांव मोरबे बांध से छह किलोमीटर दूर है। यह बांध नवी मुंबई को पानी की आपूर्ति करता है। यह माथेरान और पनवेल के बीच स्थित इरशालगढ़ किले के पास स्थित है और यह किला प्रबलगढ़ का एक सहयोगी किला है।

इरशालवाड़ी एक आदिवासी गांव है जहां पक्की सड़क नहीं है। मुंबई-पुणे राजमार्ग पर चौक गांव निकटतम शहर है। 30 जुलाई 2014 को पुणे जिले की अंबेगांव तहसील के मालिन गांव में हुए भूस्खलन के बाद यह महाराष्ट्र में सबसे बड़ा भूस्खलन है। भूस्खलन की उस घटना में लगभग 50 परिवारों वाले पूरे आदिवासी गांव में तबाही मच गई थी और मरने वालों की अंतिम संख्या 153 बताई गई थी।