महाराष्ट्र में राज्यपाल ने किया डॉ. अशोक कुमार सिंह की ‘जनसंपर्क और हिन्दी’ पुस्तक का विमोचन

द लीडर हिंदी: महाराष्ट्र के मुंबई में कल मंगलवार 11 जून 2024 को डॉ अशोक कुमार सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘जनसंपर्क और हिन्दी’ पुस्तक का विमोचन राजभवन प्रांगण में महामहिम राज्यपाल रमेश बैस जी के कमलों से संपन्न हुआ. इस मौके पर मध्य रेल के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला, उप मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार जैन, जनसंपर्क अधिकारी माइकल मैन्युल राज और प्रकाशक रामकुमार मौजूद थे.

वही पुस्तक के विमोचन के मौके पर लेखक डॉ. अशोक कुमार सिंह, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेल ने कहा कि “ये केवल एक पुस्तक नहीं है. बल्कि मेरे द्वारा भारतीय रेल में दी गई सेवा का एक निचोड़ है. यह पुस्तक शोधार्थियों एवं पीआर प्रोफेशनल्स के लिए बेहद लाभप्रद होगी और जनसंपर्क के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगी.

बता दें जाने–माने लेखक एवं इतिहासकार राजेन्द्र अकलेकर ने लिखा है कि जनसंपर्क क्या और कैसे होता है, यह मैंने सबसे पहले 90 के दशक में डॉ ए.के सिंह जी से देखा और सीखा था, और आज तक सीखते आ रहा हूँ. तब से आज तक 27 सालों में मैंने उन्हें भारतीय रेल के सबसे पहले और अहम क्षेत्रीय रेल, मध्य रेल के मुख्यालय में करीब से काम करते देखा है. चाहे रेल कार्यक्रम में प्रधान मंत्री जी का संबोधन हो या महाप्रबंधक जी का संबोधन, उनका मसौदा सहज और सरल भाषा में लिखते और देखते आ रहा हूँ.

हमेशा लोगों के बीच ही रहने वाले, सभी के प्रिय और हर किसी की जितनी हो सके उतनी मदद करने वाले डॉ सिंह ने, अपने केबिन से कभी किसी को मायूस करके नहीं भेजा. लोगों के साथ संवाद स्थापित करने और उनकी जरूरतों को समझने में जनसंपर्क की अहम भूमिका है. यह संवादात्मक प्रक्रिया न केवल लोगों के अनुभव में सुधार करने में मदद करती है, बल्कि संगठन को भी लोगों द्वारा प्रदत्त सुझाव और प्रतिक्रियाओं का संज्ञान लेने में सहायक होती है. मेरा विश्वास है कि ‘जनसंपर्क और हिन्दी’ उनकी यह पुस्तक बहुत ही लोकप्रिय एवं उपयोगी साबित होगी. डॉ सिंह की यह किताब जनसंपर्क के छात्रों को नई दिशा देगी.

वही एक चैनक ने उनके और उनकी पुस्तक के बारे में लिखा है कि विगत कई दशकों से मैं डॉ अशोक कुमार सिंह से जुड़ा हुआ हूं, डॉ सिंह काफी मिलनसार पत्रकारों के दोस्त और नेक इंसान हैं. उन्होंने इस पुस्तक में जनसंपर्क क्या होता है, उसकी उत्पत्ति, अवधारणा, स्वरूप, व्याप्ति एवं उपयोगिता एवं उसके लक्ष्य एवं नीतियों का उन्होंने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया है. इसके साथ ही स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारतीय रेल में जनसंपर्क और हिंदी के उपयोग एवं महत्व को लेकर सटीक विश्लेषण किया है. उन्होंने इस किताब में भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास के साथ साथ भारतीय रेल पर अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. इसके साथ ही उन्होंने इस पुस्तक में भारतीय रेल के विकास में डिजिटल यानि सोशल मीडिया के योगदान के बारे में एक अच्छे ढंग से वर्णन किया है. क्योकि वर्तमान समय डिजिटल मीडिया का दौर है. शीर्षक “जनसंपर्क और हिन्दी ” पर लिखी उनकी यह पुस्तक निसंदेह एक अद्भुत एवं बहुत ही उपयोगी पुस्तक होगी. यह पुस्तक न केवल जनसंपर्क एवं हिन्दी विभाग में कार्यरत कर्मियों बल्कि शोधार्थियों के लिए एक वरदान साबित होगी. आपको बता दें इस पुस्तक का प्रकाशन मुम्बई के प्रतिष्ठित प्रकाशक आर के पब्लिकेशन द्वारा हुआ है.वही पुस्तक के विमोचन के मौके पर लेखक डॉ. अशोक कुमार सिंह, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेल ने कहा कि “ये केवल एक पुस्तक नहीं है बल्कि मेरे द्वारा भारतीय रेल में दी गई सेवा का एक निचोड़ है.https://theleaderhindi.com/fire-breaks-out-in-kuwaits-residential-building-40-killed-indians-included/

Abhinav Rastogi

पत्रकारिता में 2013 से हूं. दैनिक जागरण में बतौर उप संपादक सेवा दे चुका हूं. कंटेंट क्रिएट करने से लेकर डिजिटल की विभिन्न विधाओं में पारंगत हूं.

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