मॉब लिंचिंग से बेचैन शुभम कैसे बन गए इस्लामिक स्टडीज के टॉपर

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Shubham Topper Islamic Studies

दि लीडर : हरी-भरी पहाड़ियों के बीच आबाद अलवर में इतने तंगदिल लोग! वर्ष, 2017 में जब कथित गौ-तस्करी के अरोप में पहलू खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. तब इस घटना और ख्याल ने हिंदुस्तानी गंगा-जमुनी तहजीब के हर तरफदार का मन कचोट दिया था. इंसानियत के उन हमकदमों में दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक छात्र भी शामिल रहा, जिसका नाम शुभम यादव है. ये वही शुभम हैं, जिन्होंने हाल में ही जम्मू कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के इस्लामिक स्टडीज विभाग की प्रवेश परीक्षा में टॉप किया है. (Shubham Topper Islamic Studies)

अलवर में शुभम की गृहस्थी है. वे यहीं की आबोहवा में पले-बढ़े. पिता प्रदीप कुमार किराना की दुकान चलाते और मां, टीचर हैं. शुभम दो भाई हैं. छोटा भाई अलवर में पढ़ता है. एक नॉन मुस्लिम छात्र के तौर पर इस्लामिक स्टडीज विषय चुनना और फिर उसमें टॉप करना. इस फैसले और कामयाबी के पीछे कोई ठोस रणनीति? इसके जवाब में शुभम बताते हैं, ‘ दुनियां भर में बढ़ते इस्लामोफिबक और मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने मुझे इस्लामिक स्टडीज की तरफ आकर्षित किया है. सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस में मैंने, एमए पॉलिटिकल साइंस, लॉ और इस्लामिक स्टडीज-इन तीन विषयों में आवेदन किया था. इस्लामिक स्टडीज में मुझे अप्रत्याशित कामयाबी मिली.'(Shubham Topper Islamic Studies)

समाज के दामन पर मॉल लिंचिंग का नश्तर

सिविल सेवा में जाने का इरादा रखने वाले शुभम सामाजिक बदलाव के पैरोकार हैं. वे राजा राममोहन राय का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि बदलाव की उम्र 100 साल है. भारत को और खूबसूरत बनाने के लिए हमें इस बदलाव की शुरुआत करनी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अलवर में वर्ष 2017 से अब तक मॉब लिंचिंग की करीब आधा दर्जन घटनाएं हो चुकी हैं. समाजिक तानेबाने को खंरोचती ये लिंचिंग शुभम जैसे अनगिनत नौजवानों को काफी बेचैन करती हैं. इसलिए क्योंकि, ‘मॉब लिंचिंग’ हिंदुस्तान के दामन पर पर लगने वाला इतना गहरा नश्तर है, जिसके जख्म नासूर में ढलने लगे हैं. ऐसे हादसे रोकने के लिए शुभम लोगों की सोच में बदलाव लाने पर जोर देते हैं.


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राजनीतिक प्यादा बनने से बचे समाज
डीयू के रामानुजम कॉलेज से दर्शनशास्त्र में ग्रैजुएट 21 साल के शुभम कहते हैं कि ‘समाज को राजनीतिक प्यादा बनने से बचना होगा. दुर्भाग्य से इस दिशा में मजबूत पहल होती नहीं दिख रही. वो इस बात पर हैरत जताते हैं कि जिस समाज के पास सरकार बनाने का अधिकार है. वो अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी से सरेंडर करके एक किनारे खड़ा है. नतीजतन आज सरकारें अपने मनमाफिक समाज गढ़ने में जुटी हैं. जिसके गंभीर नुकसान हैं. इस विषय पर हम सबको चेतना होगा. समाज सरकार बनाए, लेकिन सरकार को समाज बनाने का हक कतई न दे.'(Shubham Topper Islamic Studies)

शिक्षा से बदलेगी तासीर
-युवाओं के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है. आज एक खराब चलन चल पड़ा है. लोग दूसरे के कहे-सुने पर आंख बंद करके एतवार करने लगे हैं. खासकर राजनीतिक क्षेत्र से निकली बातों की तस्दीक करना भी जरूरी नहीं समझते. इससे बचने की जरूरत है. किसी बात-विषय के बारे में खुद पढ़ें. इसके बिना उस पर भरोसा न करें. छात्रों को मेरा यही संदेश है कि मन से पढ़ाई करिये. तथ्यों को खुद परखने की आदत डालें. (Shubham Topper Islamic Studies)

 

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