यूपी नगर निकाय चुनाव में महिलाओं की कितनी है दावेदारी? आंकड़े करेंगे हैरान!

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UP Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव में इस बार राजनीतिक दलों के  सियासी मिजाज बहुत कुछ बदले नजर आ रहे है। इसके पीछे का कारण भी सबको पता है कि अगले साल देश में लोकसभा के चुनाव होने है इसलिए उस हिसाब से सभी दल अपने राजनीतिक दांव पेच इस चुनाव में अजमा लेना चाहते है। जहां इस बार निकाय चुनाव में जातीय समीकरणों को परखने की योजना पर सियासी दल काम कर रहे है तो उनकी नजर आधी आबादी यानि महिलाओं पर भी है। पर क्या इस चुनाव में किसी खास दल ने  इस ओर कोई विशेष काम किया है?

44 फीसद से अधिक महिलाओं ने दावेदारी

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बार नगर निकाय के चुनाव में मेयर के पदों पर 44 फीसद से अधिक महिलाओं ने दावेदारी की है। हालांकि, जो ये प्रभावी संख्या दिख रही है इसका एक दूसरा पहलू ये भी है कि महिला उम्मीदवारों की इस संख्या में सबसे अधिक हिस्सेदारी महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की है। अगर गैर आरक्षित सीटों की बात करें तो वहां पर महिला उम्मीदवारों से अधिकतर राजनीतिक दलों की दूरी ही दिखती है।

13 सीटों में महज 20 महिलाएं ही चुनावी मैदान में

2023 के निकाय चुनाव की बात करें तो इस बार प्रदेश में मेयर के 17 पदों के लिए कुल 196 उम्मीदवार मैदान में हैं। जिसमें 87 प्रत्याशी महिलाएं हैं। जिसमें  गौर करने वाली बात ये है कि 17 मेयर की सीटों में 6 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इस ओर ध्यान देने के बाद एक दिलचस्प बात ये देखने को मिलती है कि 87 महिला उम्मीदवारों में 67 उम्मीदवार इन 6 महिला सीटों पर ही हैं। यानि बाकी, 13 सीटों में महज 20 महिलाएं ही चुनावी मैदान में हैं।

अगर इन सीटों पर महिलाओं की उम्मीदवारी देखे तो मेरठ सीट पर 15 प्रत्याशियों में तीन महिलाएं मैदान में हैं। सपा ने यहां से महिला उम्मीदवार सीमा प्रधान को टिकट दिया है जो कि विधायक अतुल प्रधान की पत्नी हैं । इसके अलावा मेरठ में आप ने भी महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। इसके साथ ही सपा ने गोरखपुर से भी महिला उम्मीदवार पर भरोसा जताया है और काजल निषाद को अपना उम्मीदवार बनाया है। गोरखपुर में तो कुल 5 महिला उम्मीदवार हैं, जो अनारक्षित सीटों में सबसे ज्यादा है। वहीं बसपा ने भी महिलाओं के लिए गैर आरक्षित सहारनपुर सीट से महिला उम्मीदवार उतारा है। हालांकि, उनके टिकट की वजह भी परिवार का समायोजन ही कहा जा है क्योंकि  खदीजा मसूद, इमरान मसूद की भाभी हैं।

प्रदेश के निकाय चुनाव में जहां सपा बसपा ने अनारक्षित सीट पर  महिलाओं को टिकट दिया है वहीं भाजपा ने केवल महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर ही महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। सीट वार आंकड़े देखें तो झांसी में कुल 6 उम्मीदवार चुनाव में मैदान में है। इसमें एक भी महिला नहीं है। इसी तरह बरेली में मेयर के 13 दावेदारों में एक भी महिला नहीं है। वहीं अलीगढ़ में मेयर के 13 उम्मीदवारों में निर्दलीय के तौर पर एक मात्र महिला चेहरे की दावेदारी है। इसी तरह वाराणसी में एकमात्र महिला उम्मीदवार आप के टिकट पर चुनावी मैदान में है। वहीं मेयर के लिए सबसे अधिक 21 प्रत्याशी प्रयागराज में हैं, इसमें केवल एक महिला है। इसके अलावा मुरादाबाद में 12 उम्मीदवारों में दो महिलाएं और अयोध्या में 9 उम्मीदवारों में 3 महिलाएं चुनावी मैदान में हैं।

इसके साथ ही अगर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की बात करें तो लखनऊ और कानपुर में 13-13 महिलाएं चुनावी मैदान में है इसी तरह गाजियाबाद में 12, फिरोजाबाद में 11 आगरा में 10 और शाहजहांपुर में 8 महिलाएं मेयर की सीट पर किस्मत आजमा रही हैं। वहीं चुनाव के बाद देखना महत्वपूर्ण ये होगा कि क्या किसी अनारक्षित सीट पर किसी महिला को जीत मिल पाती है कि नहीं और अगर नहीं मिलती तो ये भी विचार करने का एक गंभीर विषय है…

 

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