Wednesday, May 12, 2021
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यूएन रिपोर्ट: 57 देशों में महिलाओं को अपने जिस्म पर भी हक़ नहीं

 

संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की ओर से महिलाओं की सूरतेहाल को लेकर जारी ताज़ा रिपोर्ट चिंता में डालने वाली है। 21वीं तक पहुंचते पहुंचते मानव सभ्यता का हाल यह है कि उसकी पीढी को आगे बढ़ाने वाली औरत दुनिया के लगभग आधे मुल्कों में जरखरीद गुलाम की जिंदगी जी रही है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक स्वीडन उरुग्वे, नेदेरलैंड्स, कम्बोडिया और फ़िनलैंड में महिलाओं की स्थिति कुछ बेहतर है । अगर पूरी दुनिया का औसत लें तो दुनियां में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले 75 प्रतिशत ही अधिकार प्राप्त हैं।

दुनिया के 57 देशों में हालात ज्यादा खराब है। इन देशों में आधी से ज्यादा महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें अपने ही जिस्म पर भी इख्तियार नहीं है। इन महिलाओं के शारीरिक संबंध बनाने यानी सेक्स भी पार्टनर या पति अर्थात पुरुष की इच्छा होते हैं। गर्भ धारण करना है या गर्भपात करना है यह भी पुरुष तय करता है। शरीर के इस्तेमाल या फिर इलाज तक के लिए किसी और की मर्जी पर निर्भर रहना पड़ता है।

रिपोर्ट में दुनिया के 57 देशों में महिलाओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का जिक्र किया गया है। इनमें बलात्कार, जबरन स्टेरलिजेशन से लेकर वर्जिनिटी टेस्ट और खतना तक शामिल हैं। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि कैसे महिलाएं बिना डर और प्रतिबंधों के अपने शरीर को लेकर फैसले नहीं ले पाती हैं। स्वायत्तता की इस कमी का असर व्यक्तिगत तौर पर महिलाओं और लड़कियों पर तो होता ही है साथ ही इससे अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। ये कौशल को कम करती है और साथ में स्वास्थ्य और न्यायिक प्रणालियों पर भी इसकी वजह से ज्यादा लागत आती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अध्ययन किए गए देशों में से सिर्फ 56 प्रतिशत ही ऐसे हैं जहां सेक्स एजुकेशन दिए जाने को लेकर कानून या नियम हैं। यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड की डायरेक्टर नतालिया कानेम कहती हैं, ‘यह सच है कि आधी से ज्यादा महिलाओं को अब तक अपने फैसले लेने का अधिकार नहीं है। उन्हें यह तय करने का हक नहीं कि उन्हें सेक्स करना है या नहीं, गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना है या नहीं, इलाज करवाना है या नहीं।‘ जब अपने शरीर पर ही अधिकार नहीं तो महिला जीवन के किसी भी क्षेत्र में कैसे योगदान कर पायेगी।

उन्होंने आगे कहा, ‘करोड़ों महिलाएं और लड़कियां ऐसी हैं जिनका जीवन कोई और चलाता है।‘ रिपोर्ट में ऐसे 20 देशों की सूची भी है जहां बलात्कारियों को पीड़ित से शादी करने देने के लिए कानून है, ताकि वह आपराधिक धाराओं से मुक्त हो सके। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे 30 देश हैं जहां महिलाओं को घर से बाहर निकलने के लिए भी प्रतिबंध झेलने पड़ते हैं तो वहीं 43 देश ऐसे भी हैं जहां मैरिटल रेप को लेकर कानून नहीं हैं।

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