उत्तराखंड की पहाड़ियों में बिछी बर्फ की सफेद चादर, मौसम वैज्ञानिक इस वजह से चिंतित

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– मनमीत

उत्तराखंड में मौसम का दूसरा हिमपात शुक्रवार रात को हुआ। हिमपात होने से जहां हिल स्टेशनों में पर्यटकों की आमद बढ़ गई। वहीं, सेब काश्तकारों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई। हालांकि, दो हजार मीटर तक की ऊंचाई वाली पहाड़ियों में ये पहला हिमपात था।

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हिमपात सामान्य से कम हुआ और मसूरी में तो दिन तक बर्फ पिघल भी गई। तीन हजार मीटर तक की उंचाई वाले स्थानों में आधे फीट तक अच्छा हिमपात हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले कुछ दिन मौसम अब साफ रहेगा और दोपहर को गुनगुनी धूप ठंड से राहत देगी।

उत्तराखंड में पोस्ट मानसून (अक्टूबर, नवंबर और दिसम्बर में होने वाली बारिश) इस बार बेहद कमजोर रहा है। कृषि एवं बागवानी मंत्रालय की सिफारिश के बाद राज्य सरकार के सूखा घोषित करने की संभावना बन रही थी।

गुरूवार दिन भर हुई हल्की बारिश से कुछ उम्मीद बंधी। राज्य में अधिकतम 20 एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश से दो हजार मीटर से उंचाई वाले पर्वतों में औसतन तीन एसएम हिमपात की संभावना बनी। लेकिन, ज्यादा बारिश न होने से मौसम वैज्ञानिक उत्साहित नहीं है।

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मौसम वैज्ञानिकों का कहना है, राज्य में सर्दियों के इस मौसम में कम बारिश और हिमपात तो बेहद कम हुआ है। पिछले साल केदारनाथ में 35 फीट से ज्यादा बर्फबारी हुई थी। जबकि इस बार महज 18 फीट ही कुल हिमपात हुआ है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह बताते हैं कि अगले कुछ दिनां में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। वो कितना मजबूत रहेगा? ये कहना अभी संभव नहीं है। इस साल बेहद कम बारिश हुई है।

कम बारिश उत्तराखंड में ही नहीं हुई, बल्कि पूरे उत्तरी भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत में भी यही आलम रहा। इस वजह से आने वाले दिनों में सामान्य से तीन से चार डिग्री तापमान ज्यादा रहने का अनुमान है।

 

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