कॉमेडियन से यूक्रेन के राष्ट्रपति बनने तक, ऐसा रहा ज़ेलेंस्की की ज़िंदगी का सफर

द लीडर : रूस का पहला निशाना मैं हूं. दूसरा मेरा परिवार है. लेकिन हम यहां हैं. हमारी फौज और नागरिक भी. हम अपनी आज़ादी और देश की रक्षा कर रहे हैं. बेशक दुनिया ने हमें अकेला छोड़ दिया.इस वक़्त हमें पनाह नहीं बल्कि हथियारों की ज़रूरत है. ये दम यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का है. जो ताक़तवर रूस के सामने जंग के मैदान में हैं. वो रूस जिसकी घुड़की पर न सिर्फ अमेरिका बल्कि नाटो भी सहमा है. (Ukraine President Volodymyr Zelensky)

सेना की वर्दी में जंग के मैदान से ज़ेलेंस्की के जो बयान और तस्वीरें सामने अाई हैं. उस पर पूरी दुनिया उनकी हिम्मत और हौसले को सलाम कर रही है. ख़ासकर वे जिनका यक़ीन, जंग के बजाय प्रेम और शांति पर है.

44 साल के ज़ेलेंस्की के राष्ट्रपति बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. 2019 में सोविय संघ के सिरमोर कहे जाने वाले यूक्रेन का राष्ट्रपति बनने से पहले वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की, एक मशहूर कॉमेडियन और एक्टर हुआ करते थे.


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कीव में पैदा हुए ज़ेलेंस्की ने 17 साल की उम्र में प्रोफेशनल कॉमेडी शुरू कर दी थी. आमतौर पर अपने यहां इस उम्र के लड़के करियर की उलझन में ही फंसे होते हैं. ज़ेलेंस्की लॉ ग्रैजुएट हैं, लेकिन कॉमेडी और एक्टिंग को पेशे के तौर चुना. कवार्टल 95 स्टूडियो, जो यू्क्रेन का फिल्म प्रोडक्शन हाउस है. इसका एक मशहूर शो है-सर्वेंट ऑफ पीयूपल. साल 2015 से 2019 के बीच इस टीवी शो ने यूक्रेन में बेशुमार शोहरत बंटोरी. (Ukraine President Volodymyr Zelensky)

सर्वेंट ऑफ द पीयूपल में वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन के राष्ट्रपति का किरदार अदा किया था. कौन जानता था कि रूहपर्ले पर्दे पर राष्ट्रपति का किरदार निभाने वाले ज़ेलेंस्की हकीक़त में यूक्रेन के अगले राष्ट्रपति होंगे. आपको बता दें कि सर्वेंट ऑफ पीयूपल, यूक्रेन का एक राजनीतिक दल भी है. जिसके नाम पर ये शो बना था.

2019 के आम चुनावों में ज़ेलेंस्की की राष्ट्रपति पद की दावेदारी को जनता ने सिर-आंखों पर लिया. और 72 प्रतिशत से ज़्यादा वोट देकर उन्हें अपना राष्ट्रपति चुन लिया. राष्ट्रपति बनने के तीन साल के अरसे में ज़ेलेंस्की यूक्रेन की अवाम के दिलो-दिमाग पर छा गए. और अपने देश की स्वतंत्रता, रक्षा और तरक्की की कोशिशों में जुट गए. अमेरिका और नोटो से नज़दीकी बढ़ाई. जो रूस को रास नहीं आई और वो यूक्रेन की घेराबंदी में जुट गया. (Ukraine President Volodymyr Zelensky)

4.41 करोड़ की आबादी वाला यूक्रेन 1991 तक सोवियत संघ रूस का हिस्सा हुआ करता था. जो यूनियन के 15 गणराज्यों में रूस के बाद सबसे मजबूत था. 1991 में ये अलग देश बना. लेकिन रूस अब दोबारा से सोवियत यूनियन की ताक़त हासिल करने में जुटा है. इसमें यूक्रेन उसके लिए सबसे अहम है. भौगोलिक, आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से भी.

कभी लेनिन ने यूक्रेन को रूसी साम्राज्य का सिर बताया था, और कहा था कि इसके कटने का मतलब है कि ये साम्राज्य सिरविहीन हो जाएगा. इसीलिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने काफी अरसे तक यूक्रेन में अपने कठपुतली राष्ट्रपति बनाए रखे. पूर्व राष्ट्रपति यानुकोविच के शासन में 2008 से ही रूस ने यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनने से रोक रखा था.

लेकिन ज़ेलेंस्की के राज में पुतिन ऐसा नहीं कर पाए. और यूक्रेन नाटो की सदस्यता पाने के लिए जी-जान लगाए रहा. यहां एक दिलचस्प तथ्य ये भी है कि अपनी सुरक्षा की उम्मीद में यूक्रेन जिस नाटो का सदस्य बनने के लिए बेताब रहा. उसने भी जंग के हालात में आंखें फेर लीं. और सेना भेजने से क़दम पीछे खींच लिए. (Ukraine President Volodymyr Zelensky)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ज़ेलेंस्की वोलोदिमीर को अमेरिका ने सुरक्षित निकालकर पनाह देने का प्रस्ताव दिया है. जिसे ज़ेलेंस्की ने न सिर्फ ख़ारिज कर दिया, बल्कि कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि, हमें पनाह की नहीं, हथियारों की ज़रूरत है. हम अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ेंगे.


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