इस रमजान सऊदी अरब की मस्जिदों में सहरी-इफ्तार पर बैन, एतिकाफ भी नहीं

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सऊदी अरब ने इस बार रमजान के महीने के दौरान मस्जिदों, रेस्तरां और होटलों में इफ्तार और सुहूर यानी सहरी पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश कोविड-19 से लोगों की हिफाजत की सिफारिशों को ध्यान में रखकर किया गया है, जो रमजान के साथ ही ईद पर लागू होगा।

छह सऊदी अरब मंत्रालय, जिसमें गृह, ग्रामीण मामले, नगरपालिका, इस्लामी मामले, मीडिया और पर्यटन मंत्रालय ने सऊदी मीडिया के जरिए ईद और रमजान में कोरोना वायरस संबंधी योजना को साफ किया है।

योजना के अनुसार, नगर मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय रेस्तरां और होटलों में सभी इफ्तार और सहरी के कार्यक्रमों को रोकेगा। सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी और कोरोनोवायरस योजनाओं के उल्लंघन को रोकने के लिए कैमरे लगाए जाएंगे। सार्वजनिक सभा सीमित दायरे में मंजूरी मिलने पर होगी, जबकि छोटे पार्कों को अगली सूचना तक बंद कर दिया जाएगा।

मॉल और शॉपिंग सेंटर रमजान के महीने के दौरान कोरोनोवायरस की रोकथाम के उपायों के साथ सातों दिन चौबीस घंटे खुलेंगे। रेस्तरां को डिलीवरी भेजने के लिए अनुमति दी गई है।

कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए मस्जिदों में एतिकाफ पर भी रोक लगा दी गई है। यह रोक मक्का की ग्रैंड मस्जिद और पैगंबर की मस्जिद में रहने पर पर भी लागू होगी।

सोमवार को ट्विटर पर यह घोषणा दोनों पवित्र मस्जिदों का रखरखाव करने वाले प्रबंधन की ओर से की गई। कहा गया कि कोविड-19 से बचाव के लिए यह फैसला लेना जरूरी था।

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प्रबंधन कमेटी के प्रमुख शेख अब्दुल रहमान अल-सुदैस ने संक्रमण के खतरों को ध्यान में रखते हुए पवित्र रमजान के पूरे महीने में रोजाना पांच बार की नमाज, इफ्तार, तरावीह की नमाज के निलंबित होने की पुष्टि की।

उन्होंने कहा कि केवल प्रबंधन कमेटी प्रमुख पदाधिकारी रमजान में दोनों मस्जिदों में इस फर्ज को अदा करने के लिए अधिकृत किए गए हैं। इससे पहले यहां काम करने वाले सभी लोगों की जांच और सुरक्षा का बंदोबस्त सुनिश्चित किया जाएगा। मस्जिदों के भीतर 10 थर्मल कैमरे लगेंगे। नमाज अल्लाह से कोरोना वायरस को बंद करने के लिए होंगी।

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दोनों मस्जिदों में रमजान के आखिरी अशरे में कम से कम एक लाख मुसलमान एतिकाफ को अंजाम देते हैं। फिलहाल इन नमाजों को बंद कर दिया गया है।

सऊदी अरब के वरिष्ठ विद्वानों की परिषद ने दुनियाभर के मुसलमानों से अपने घरों के अंदर नमाज और इबादत का अनुरोध किया। खासतौर पर यह सलाह उन मुसलमानों के लिए है, जहां महामारी के चलते सख्त प्रतिबंध या लॉकडाउन है।

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