आवारा कुत्तों के खाने के अधिकार से संबंधित अंतरिम आदेश सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया

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द लीडर | सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना वह अंतरिम आदेश वापस ले लिया, जिसके तहत उसने आवारा कुत्तों को खिलाने के अधिकार के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय के 2021 के फैसले पर रोक लगाई थी. उच्च न्यायालय ने 2021 में अपने आदेश में कहा था कि आवारा कुत्तों को भी भोजन का अधिकार है और नागरिकों को कुत्तों को खिलाने का अधिकार.

शीर्ष अदालत ने एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘ह्यूमैन फाउंडेशन फॉर पीपल एंड एनिमल्स’ की याचिका पर चार मार्च को इस आदेश पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इससे आवारा कुत्तों से खतरों की आशंका बढ़ेगी. न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एस. रवीन्द्र भट तथा न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने इन दलीलों का संज्ञान लिया कि हाई कोर्ट का आदेश एक दीवानी मामले में सुनाया गया था, जिसमें दो निजी पक्षकार आमने-सामने थे और एनजीओ को इस मुकदमे में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

जानें- क्या है मामला

संबंधित मामलों में एक याचिकाकर्ता ने अदालत से कुत्ते के काटने के मामलों और शहर में आवारा कुत्तों की समस्या पर गौर करने का आग्रह किया. न्यायमूर्ति ललित ने अदालत में मौजूद वकीलों को अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण मामलों की विशाल पेंडेंसी के मुद्दे पर संबोधित किया और कहा कि अदालत को किस तरह के मामलों को प्राथमिकता देनी है. विशेष रूप से ऐसे मामलों में उन्होंने देखा कि याचिकाकर्ताओं के पास हाईकोर्टों के समक्ष एक प्रभावी उपाय है और उन्हें पहले उनसे संपर्क करना चाहिए.


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इस फैसले पर लगा दी गई थी रोक

पीठ ने इस तथ्य का भी संज्ञान लिया कि असली मुकदमे के दोनों पक्षों के बीच विवाद का निस्तारण हो चुका था, इसलिए तीसरे पक्ष के इशारे पर मुकदमे को जारी रखने की जरूरत नहीं थी. अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘यह विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दिल्ली हाई कोर्ट के 24 जून 2021 के फैसले से उत्पन्न होती है. अपने फैसले के तहत न्यायाधीश कई निष्कर्ष पर पहुंचे हैं.’’ न्यायालय ने कहा कि बाद में इस फैसले पर रोक लगा दी गई थी.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह याचिका (हाई कोर्ट के) फैसले के खिलाफ अपील की अनुमति के लिए दायर की गई थी, क्योंकि एनजीओ इस वाद में पक्षकार नहीं था. ऐसा समझा जाता है कि मूल वाद के दोनों पक्षों ने मामला सुलझा लिया था. चूंकि मामला दोनों निजी पक्षों के बीच विवाद को लेकर था इसलिए एसएलपी दायर करने की अनुमति मांगने का याचिकाकर्ता का कोई अधिकार नहीं है. हम, इसलिए याचिका का निस्तारण करते हैं और अंतरिम आदेश वापस लेते हैं.’’

कोर्ट ने लिया अंतरिम आदेश वापस

न्यायालय ने कहा कि बाद में इस फैसले पर रोक लगा दी गयी थी. पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह याचिका (उच्च न्यायालय के) फैसले के खिलाफ अपील की अनुमति के लिए दायर की गई थी, क्योंकि एनजीओ इस वाद में पक्षकार नहीं था। ऐसा समझा जाता है कि मूल वाद के दोनों पक्षों ने मामला सुलझा लिया था. चूंकि मामला दोनों निजी पक्षों के बीच विवाद को लेकर था, इसलिए एसएलपी दायर करने की अनुमति मांगने का याचिकाकर्ता का कोई अधिकार नहीं है. हम, इसलिए याचिका का निस्तारण करते हैं और अंतरिम आदेश वापस लेते हैं.’’

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